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Hisar News: 1000 वारदात के खुलासे के लिए विसरा रिपोर्ट की दरकार, पीड़ितों को न्याय का इंतजार

Sat, 27 May 2023 10:05 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
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हिसार। प्रदेश की चौथी क्षेत्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला में कर्मचारियों की कमी के कारण करीब 1000 विसरा रिपोर्ट पेंडिंग हैं। रिपोर्ट न मिलने के कारण पुलिस की जांच प्रभावित हो रही है। ऐसे कई आपराधिक मामले हैं जिनकी जांच विसरा रिपोर्ट न आने के कारण अटकी पड़ी है। इस कारण पीड़ितों को भी न्याय मिलने में देरी हो रही है और आरोपियों पर कार्रवाई नहीं हो रही। हालांकि सरकार द्वारा स्टाफ की भर्ती के प्रयास किए जा रहे हैं। संवाद
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ये पद हैं खाली

फोरेंसिक लैब की हर विंग में सीनियर असिस्टेंट, लैब असिस्टेंट के पद खाली पड़े हैं। लैब में कुल 12 से अधिक पद खाली हैं। जिस कारण जांच प्रभावित हो रही है।

लैब में हैं पांच डिविजन
नई पुलिस लाइन में क्षेत्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला बनाई गई है। इस प्रयोगशाला में नारकोटिक्स, केमिस्ट्री, बैलिस्टिक, टॉक्सिकोलॉजी और सेरोलॉजी की जांच होती है। लैब में हिसार, सिरसा, फतेहाबाद, हांसी और जींद के सैंपल जांच के लिए आते हैं। लैब में जांच होने के बाद रिपोर्ट संबंधित चिकित्सक और पुलिस को सौंपी जाती है। पेचीदा मामलों की जांच विसरा रिपोर्ट के आधार पर आगे बढ़ाई जाती है और आरोपियों को सजा दिलवाने के लिए विसरा रिपोर्ट अहम होती है।
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लैब में इस तरह की होती हैं जांच
नारकोटिक्स विंग : इस विंग में मादक पदार्थों की जांच होती है। शराब, बीयर, स्मैक, हेरोइन, गांजा, अफीम व कोई भी नशीली वस्तु और दूषित खाने की जांच भी होती है। जांच करने के बाद सामने आता है कि मृतक के शरीर के अंदर कौन सा नशा पाया गया है जिसके कारण उसकी मौत हुई है।
केमिस्ट्री विंग : इस विंग में वारदात में प्रयोग रसायन की जांच होती है। जैसे तेजाब और आगजनी की घटनाओं में प्रयोग किया गया रसायन। जांच में पता चल जाता है कि वारदात के दौरान कौन से रसायन इस्तेमाल किया गया।
टॉक्सिकोलॉजी विंग: इस विंग में रसायनों की जांच की जाती है। मृतक के शरीर के अंदर कौन सा रसायन है। जिसके कारण उसकी मौत हुई है। जांच में पता चल जाता है कि कौन से जहरीले पदार्थ का सेवन करने से उसकी मौत हुई है या किसी अन्य कारणों से व्यक्ति की मौत हुई है।
सेरोलॉजी विंग: इस विंग में खून की जांच, कपड़ों पर लगा खून, बाल, पसीना आदि की जांच की जाती है। जांच में पता चल जाता है कि हथियार या मृतक के कपड़ों पर लगा खून किसका है।

बैलिस्टिक विंग: फोरेंसिक लैब में यह विंग अभी शुरू नहीं हुई है। शुरू होने के बाद इस विंग में वारदात के दौरान कौन से हथियार का इस्तेमाल किया गया है इस बारे में जानकारी मिलती है। मृतक के शरीर के अंदर से मिले बारूद के कण और जिस हथियार से गोली चलाई गई उसका मिलान किया जाता है।

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पुलिस कर रही विसरा रिपोर्ट का इंतजार
शहर के मशहूर नेत्र रोग विशेषज्ञ अशोक गर्ग की विसरा जांच के लिए लैब में भेजी हुई है। अभी तक लैब से रिपोर्ट आई नहीं है। पुलिस की जांच भी रिपोर्ट आने के बाद आगे बढ़ेगी। पोस्टमार्टम में मृतक के पेट से 1.5 लीटर कीटनाशक मिला था। पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक को भी इस पर संदेह है। जिसके चलते सैंपल जांच के लिए लैब में भेज गए हैं।


जल्द नए स्टाफ की नियुक्ति हो जाएगी
लैब में कई पद खाली हैं, जिस कारण करीब 1000 विसरा रिपोर्ट पेंडिंग हैं। लैब में पदों को भरने के लिए सरकार प्रयासरत है। जल्द नए स्टाफ की नियुक्ति हो जाएगी।
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- डॉ. अजय कुमार, असिस्टेंट डायरेक्टर कम इंचार्ज, फोरेंसिक लैब।
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