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Hisar News: गुलाबी सुंडी पर नियंत्रण के लिए 15 मई से पहले पूरी कर लें नरमा की बिजाई

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हिसार। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (एचएयू) में हरियाणा, पंजाब, राजस्थान के कृषि वैज्ञानिक, अधिकारी व निजी बीज कंपनी के प्रतिनिधियों के लिए गुलाबी सुंडी नियंत्रण पर एक दिवसीय सेमिनार आयोजित किया गया। मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. बीआर कांबोज ने कहा कि देश के उत्तरी क्षेत्र में लगातार गुलाबी सुंडी का बढ़ता प्रकोप किसानों एवं कृषि वैज्ञानिकों के लिए चिंता का विषय है। समाधान के लिए हमें सामूहिक रूप से एकजुट होकर ठोस कदम उठाने होंगे।
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उन्होंने कहा कि गुलाबी सुंडी पर नियंत्रण के लिए किसानों को 15 मई से पहले नरमा की बिजाई पूरी कर लेनी होगी। सेमिनार में कपास उगाने वाले 10 जिलों के किसान प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कुलपति ने कहा कि पिछले वर्ष गुलाबी सुंडी का प्रकोप ज्यादा रहा था। इसके नियंत्रण के लिए अंधाधुंध कीटनाशकों का प्रयोग किया गया। कीटनाशकों का इतना प्रयोग चिंता का विषय है। इस कीट के नियंत्रण के लिए जैविक कीटनाशक एवं अन्य कीट प्रबंधन के उपायों को खोजना होगा। हितधारकों के साथ मिलकर सामूहिक प्रयास करने होंगे। इसके लिए सबसे पहला उपाय यही है कि किसान नरमे की बनछटियों को खेत में न रखें। अगर रखी हुई हैं तो बिजाई से पहले इन्हें अच्छे ढंग से झाड़कर दूसरे स्थान पर रख दें और इनके अधखिले टिंडों एवं सूखे कचरे को नष्ट कर दें ताकि इन बनछटियों से निकलने वाली गुलाबी सुंडियों को रोका जा सके। किसान नरमे की बिजाई उपरांत अपने खेत की निरंतर निगरानी रखें।
विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. बलवान सिंह मंडल ने कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से गुलाबी सुंडी के प्रबंधन के लिए किए गए कार्यों की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। अनुसंधान निदेशक डॉ. जीतराम शर्मा ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत किया। परियोजना निदेशक डॉ. एसके धनखड़ ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। बैठक में डॉ. एसएस यादव, डॉ. करमल सिंह, डॉ. सतनाम सिंह, डॉ. प्रदीप कुमार, आरपी सिहाग, डॉ. ऋषि कुमार आदि मौजूद रहे।
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