फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Hisar News: आम नहीं बेहद खास है ये लाल शिमला मिर्च, दिल्ली में बढ़ी डिमांड

विज्ञापन
विज्ञापन
हिसार। खाने के शौकीन लोगों को शिमला मिर्च की विदेशी वैराइटी खास पसंद आ रही है। लाल व पीले रंग की इस फसल को तैयार होने में 90 दिन का समय लगता है। एंटी ऑक्सीडेंट गुणों की वजह से यह सेहत के लिए भी फायदेमंद है। इसीलिए बड़े शहरों में इसकी डिमांड बढ़ती जा रही है। इसे देखते हुए हिसार के 100 से अधिक किसान अब इसकी खेती करने लगे हैं।
विज्ञापन

गांव प्रभुवाला के किसान शिवशंकर वर्ष 2005 से बागवानी करते हैं। करीब 20 एकड़ में इन्होंने किन्नू, बेर, नींबू, मौसमी आदि की खेती की है। चार साल पहले इन्हें करनाल के इंडो इजराइल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर वेजिटेबिल्स में शिमला मिर्च की खेती का प्रशिक्षण मिला। शिवशंकर ने यहीं पर हालैंड में होने वाले लाल व शिमला मिर्च के बारे में जानकारी ली।
दोमट मिट्टी में होने वाली इस फसल को इन्होंने अपने गांव प्रभुवाला की मिट्टी पर उगाया। तैयार फसल को दिल्ली की आजाद नगर मंडी ले गए। वहां इसकी काफी डिमांड है। अधिकतर होटलों में इसका प्रयोग सलाद के रूप में होता है। इसके अलावा पिज्जा, बर्गर में भी इसका उपयोग किया जा रहा है। धीरे-धीरे अब 100 से अधिक किसान इसकी खेती करने लगे हैं।
विज्ञापन

-----
अगस्त में बिजाई व नवंबर से मिलता है फल
शिवशंकर बताते हैं कि 15 से 30 अगस्त के बीच इसकी रोपाई का उत्तम समय है। इसके लिए करीब एक माह पहले इसके पौधे तैयार किए जाते हैं। रोपाई के लिए पहले नेट हाउस तैयार किया जाता है। 90 दिन बाद फल तोड़ने लायक हो जाता है। सिंचाई के लिए टपका विधि उत्तम है। प्रति एकड़ करीब ढाई लाख रुपये की लागत आती है। जबकि, 10 से 12 लाख रुपये मुनाफा मिलता है।
एंटी ऑक्सीडेंट से भरपूर है शिमला मिर्च
एचएयू के सब्जी विज्ञान विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष और वर्तमान में महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय करनाल के सब्जी विज्ञान विभाग में कंसलटेंट प्रोफेसर डॉ. सुरेश कुमार अरोड़ा बताते हैं कि हरी, लाल व पीले रंग की शिमला मिर्च में एंटी ऑक्सीडेंट गुण अधिक होता है। इसलिए यह शरीर से हानिकारक रसायनों को बाहर निकालते हैं। सब्जी या सलाद के रूप में इसका प्रयोग शरीर के लिए काफी फायदेमंद है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें