हिसार। महाबीर कॉलोनी के जलघर के सामने बनी उपकार कॉलोनी में रहने वाले सुनील सोनी का पांच साल का बेटा शुभम 25 अगस्त 2013 को घर के बाहर खेलते हुए लापता हो गया था। परिजनों ने दिन रात शुभम की तलाश की, लेकिन उसका कहीं कोई अता-पता नहीं चला। तीन दिन बाद घर से कुछ ही दूरी पर शिव चौक पर बनी पानी की टैंक में शुभम का शव मिला। पोस्टमार्टम में खुलासा हुआ था कि शुभम की गला दबा कर हत्या की थी। शव मिलने के बाद परिजनों और अन्य ने नागरिक अस्पताल में काफी हंगामा किया था। हत्यारों की पहचान और गिरफ्तारी की मांग को लेकर शहर की सड़कों पर प्रदर्शन हुए थे। लघु सचिवालय के बाहर भी धरना-प्रदर्शन हुआ था। शुभम के दादा रामू ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय के बाहर आत्महत्या करने का प्रयास किया था। फिर भी पुलिस ने बिना गुत्थी सुलझाए फाइल को बंद कर दिया।
शुभम के परिजनों को न्याय मिलने की उम्मीद अब टूट चुकी है। विधायक से प्रधानमंत्री तक न्याय की गुहार लगाई, लेकिन सिर्फ कोरे आश्वासन मिले। शुभम के रामू का कहना है कि 9 साल से थाने-चौकियों में भटक रहे हैं। मलाल रहेगा कि पोते को न्याय नहीं दिला पाया। अब बूढ़ा हो चुका हूं, न्याय पाने के लिए थक चुका हूं। उनका कहना है कि केस जहां से शुरू हुआ था नौ साल बीतने के बाद भी वहीं पर है। पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। जनता का साथ मिला, सड़कों पर भी उतरी तो पुलिस ने केस दर्ज किया। छह साल तक पूरे परिवार ने न्याय पाने के लिए संघर्ष किया। इसके बाद लचर सिस्टम के सामने घुटने टेक दिए। प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, मुख्यमंत्री सभी को पत्र लिखकर न्याय मांगा। उन पत्रों का जवाब भी नहीं आया। फिर हमें थाने-चौकी बुलाया जाता। फिर वही सवाल पूछे जाते। कब तक उनके सवालों के जवाब देते रहें। आखिर में जाना ही छोड़ दिया। पुलिस प्रवक्ता विकास का कहना है कि इस मामले में जांच पूरी होने के बाद फाइल बंद हो चुकी है। संवाद
गौतम ने कहा था कुछ बना तो न्याय दिलवाऊंगा
रामू का कहना है कि पोते की मौत के बाद आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग लेकर गौतम सरदाना ने हमारा साथ दिया था। धरने-प्रदर्शन में हमारे साथ था। उस समय उसने कहा था कि अगर, मैं कुछ बना तो तुम्हें न्याय दिलवाऊंगा। अब वे शहर के मेयर बन चुके हैं। उनके पास भी फरियाद लेकर गया था, उन्होंने भी कुछ नहीं किया।
शक के आधार पर पांच लोगों का हुआ था नारको टेस्ट
शुभम के पिता सुनील सोनी का कहना है कि शुरुआत से ही पुलिस की जांच पर सवाल उठ रहे थे। सुनील ने बताया कि पुलिस को परिजनों पर शक था। पुलिस ने पांच लोगों का नारको टेस्ट करवाया था। उसमें मैं, मेरी पत्नी नीलम, हीरालाल, निर्मला और राजेश सोनी शामिल थे। शुरुआत से ही पुलिस धीमी जांच कर रही थी। बार-बार सरकार से सीबीआई से जांच करवाने की मांग की लेकिन, न जांच करवाई गई और न ही हिसार की पुलिस कातिलों का पता लगा पाई।
हत्यारे तो पकड़े नहीं गए, उल्टा रोड जाम करने पर पांच साल तक चलता रहा केस
सुनील ने बताया कि पुलिस शुभम की हत्या की वारदात का आज तक खुलासा नहीं कर पाई। हां, पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान मेरे और अन्य रास्ता रोकने का केस दर्ज कर दिया था। पांच साल तक कोर्ट कचहरी के चक्कर काटते रहे। इसके बाद बरी हुए। मेरे पिता पर भी केस दर्ज किया था।