हिसार। इन दिनों डियर पार्क कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है। हालात यह है कि धांसू रोड पर बने डियर पार्क में चार प्रजाति के 108 हिरण हैं। मगर इन हिरणों को खिलाने से लेकर देखरेख का जिम्मा सिर्फ एक कर्मचारी पर है। वन्य प्राणी विभाग के अनुसार डियर पार्क में कम से कम 14 कर्मचारियों का स्टाफ होना जरूरी है। मगर यहां पर चार कर्मचारी ही हैं। इनमें एक इंस्पेक्टर जयविंद्र नेहरा और एक सब इंस्पेक्टर दिनेश जांगड़ा शामिल हैं। इसके अलावा एक कर्मचारी रेस्कयू वैन चलाता है।
वन्य प्राणी विभाग की ओर से कई बार गुरुग्राम के परिमंडल कार्यालय वन्य प्राणी विभाग के आला अफसरों को पत्र लिखा गया। मगर अब तक यहां कोई कर्मचारी की नियुक्ति नहीं हुई है। फिलहाल चार कर्मचारियों में से दो कर्मचारी कौशल रोजगार के तहत लगे हुए हैं। बता दें, कि डियर पार्क में छुट्टी के दिन बच्चों से लेकर बड़ों की भीड़ रहती है। आसपास के अलावा दूर-दराज क्षेत्र से लोग हिरणों को देखने आते हैं।
उपचार के लिए बुलाना पड़ता है चिकित्सक
वन्य प्राणियों के उपचार के लिए डियर पार्क में टेंपरेरी ट्रीटमेंट सेंटर बना हुआ है। इसमें घायल हिरण, नील गाय, बंदर सहित अन्य वन्य जीवों का प्राथमिक उपचार किया जाता है। मगर विभाग के पास चिकित्सक तक नहीं है। ऐसे में वन्य जीवों का उपचार करने के लिए भी लुवास, धांसू सहित अन्य जगहों से चिकित्सक बुलाना पड़ता है। उल्लेखनीय है कि डियर पार्क में बने टेंपरेरी ट्रीटमेंट सेंटर को स्थायी सेंटर बनाया जाना है।
डियर पार्क पर एक नजर
कुल क्षेत्र: 46 एकड़
कुल हिरण : 108
प्रजाति : चीतल, चिंकारा, काला और सांभर हिरण
निर्माण वर्ष: 1987
वर्जन
डियर पार्क में कर्मचारियों की काफी कमी है। किसी न किसी तरह स्टाफ से काम चलाया जा रहा है। कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए कई बार मुख्यालय को पत्र लिखा जा चुका है। अब दोबारा पत्र भेजा जाएगा।
- वेदप्रकाश, डीएफओ, वन्य प्राणी विभाग