हिसार। चुनावी वादों में सड़कें और हाईवे विकसित करने के सपने दिखाए जाते हैं, लेकिन जनता साल दर साल जर्जर हाल सड़कों से जूझती रहती है। हिसार के साथ भी ऐसा ही है। बारिश आने के बाद तो यूं लगता है जैसे पूरे शहर को खोद डाला है। चुनाव में वोट मांगने के लिए आते-जाते नेताओं को यह सब दिखता है परंतु इनसे निजात के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम नहीं हो पाता। हादसे होते रहते हैं, लोग सड़कों पर उतरते हैं, आंदोलन करते हैं, बावजूद इसके सरकार के नुमाइंदों के कान नहीं खुलते।
शहर में सड़कों की हालत बेहद खराब है। सबसे व्यस्ततम मार्ग दिल्ली रोड पर गुजरें तो ऐसा लगता है किसी गांव को जाने वाली सड़क है। लाखों रुपये वर्ग गज वाले भूखंड जिन कॉलोनियों में है, वहां सड़कों के नाम पर सिर्फ गड्ढे है। बारिश के बाद तो हालात और खराब हो गए हैं। शहर के किसी मोहल्ले और गली में कोई ऐसी सड़क नहीं बची जो सही सलामत हो। लोग बताते हैं कि बात बारिश से सड़कें खराब होने की नहीं है। दरअसल शहर का सुनियोजित विकास सबसे बड़ी दिक्कत है। मुख्य सड़कें और कॉलोनियों में जाने वाली लिंक रोड की ज्यामिति सही नहीं है। या तो मुख्य रोड नीचे है या काॅलोनियों की सड़कें। इस वजह से बारिश में जलभराव के हालात रहते हैं। निकासी नाले दुरुस्त नहीं होने से करोड़ों की लागत वाली सड़कें उखड़ जाती हैं। कमीशन के चक्कर में बारिश से ठीक पहले सड़कें बनवाने के टेंडर जारी किए जाते हैं। बारिश आते ही ये सड़कें फिर से उखड़ जाती हैं और लोग अगली बारिश तक गड्ढों से जूझते है।
कॉलोनियों में सड़कों के लिए तरसे लोग
सातरोड एरिया में लोग सड़कों के लिए तरसते रहे। पेयजल लाइन बिछाने वाली कंपनी ने सड़कों को खोद कर छोड़ दिया और फिर पेयजल लाइन बिछाने का काम बीच में छोड़ दिया। इस पर निगम ने ब्लैक लिस्ट कर दिया। इसके बाद न तो पेयजल लाइन बिछी और न ही सड़कें बन सकीं।
यह कहना है लोगों का
सड़कें बुनियादी सुविधाओं में आती हैं, लेकिन कमीशन बाजी के चक्कर में बड़ा गोलमाल होता है। बारिश से ठीक पहले टेंडर जारी किए जाते हैं, ताकि बारिश आते ही फिर से टूटे और नए टेंडर खोले जाएं। इसमें अधिकारियों को मोटा कमीशन मिलता है। - जगदीश जैन
गली-मोहल्लों में ही नहीं, प्रमुख मार्गों पर बड़े-बड़े गड्ढे हो चुके हैं, जो खोखले विकास की तस्वीर बयां करते हैं। सड़कों की हालत काफी खराब है। अधिकारियों को समय-समय सड़कों की सुध लेनी चाहिए। सही समय पर सड़कों के टेंडर किए जाने चाहिए। - सुभाष
जैसे ही सड़कों की मरम्मत के टेंडर खत्म होने की तिथि नजदीक आने लगे, वैसे ही नए टेंडर की तैयारी शुरू कर देनी चाहिए ताकि सही समय पर सड़कों का निर्माण किया जा सके। टूटी सड़कों से न केवल शहर की छवि खराब होती है,राहगीरों को भारी परेशानी होती है। - महेंद्र
सड़कों के टूटने से न सिर्फ हादसे की आशंका बनी रहती है, वाहनों को भी नुकसान पहुंचता है। सड़कें किसी भी क्षेत्र के विकास में अहम भूमिका निभाती हैं। शहर की हालत यह है कि किसी भी सड़क को आदर्श नहीं कह सकते। - संजय