अभिनय रंगमंच की ओर से आयोजित रंग आंगन उत्सव के सातवें दिन बाल भवन में नाटक ‘आग दी एक बात है का
हिसार। अभिनय रंगमंच की ओर से आयोजित रंग आंगन उत्सव के सातवें दिन बाल भवन में नाटक ‘आग की एक बात है'''' का मंचन किया गया। पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ की ओर से प्रस्तुत इस नाटक निर्देशन टीकम जोशी एवं नवदीप कौर ने किया। नाटक में मानवीय संवेदना और प्रेम की कहानी है। अमृता प्रीतम, साहिर लुधियानवी, इमरोज और समाज के बीच संबंध के बिछाए कांटों के बीच का रिश्ता दिखता है। अमृता प्रीतम की लेखनी और साहिर लुधियानवी के शेर ने नाटक से दर्शकों को बांधे रखा।
यह माना कि मुझे इजहारे मोहब्बत नहीं आता.../ हम आपकी आंखों में दिल को बसा दें तो.../अब रात ढली तो तू मिला...जैसे दमदार नज्म और बेहतरीन संवाद अभिनेता और अभिनेत्री के मजबूत और दमदार प्रदर्शन के बीच समाज के बंधन और संकीर्ण मानसिकता को भी प्रतिबिंबित करता है। अमृता समाज की बेतुकी बातों को छोड़ कर अपनी जिंदगी को जीने के लिए इंसानियत और रूहानियत को जरिया बनाती हैं। साहिर लुधियानवी भी इंसानियत के लिए जीने वाले और सरहदों की सीमा से परे हैं तो अमृता भी उनकी राह की एक मुसाफिर हैं। दोनों चलते हैं, बिछुड़ते हैं। समाज के बिछाए कांटों के बीच अपने लहू-लुहान पैर से भी अमृता पद्मश्री के सफर को तय करती हुई पाठकों के दिलों में बस जाती हैं।
साहिर लुधियानवी के बांबे जाने के बाद उन्हें इमरोज का सहारा मिलता है। जिंदगी को अपने साथ जीने के लिए वह अपनी उम्र और रिश्तों को दरकिनार करते नजर आती हैं। नाटक में अभिनय उम्दा रहा। प्रकाश संगीत भी दमदार रहा। रिकाॅर्ड गाना और नज़्म का उपयोग नाटक में ज्यादा दिखा। इमरोज के रूप में मध्य प्रदेश नाट्य विद्यालय के निदेशक टीकम जोशी और अमृता प्रीतम के रूप में डिपार्टमेंट ऑफ इंडियन थिएटर की चेयरपर्सन नवदीप कौर ने भूमिका अदा की। संस्था के अध्यक्ष मनोज बंसल ने बताया कि इसके बाद बाल भवन में अंधेर नगरी और कलंधिका भोपाल द्वारा आओ मन की गांठें खोले का मंचन किया जाएगा।