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Hisar News: 12 साल पहले 2 पहलवान से शुरू हुई थी एकेडमी, आज 200 पहलवान देश के लिए बहा रहे पसीना

Sun, 14 Apr 2024 03:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
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 मिर्चपुर की शहीद भगत सिंह इंटरनेशनल कुश्ती एकेडमी में अभ्यास करते ​खिलाड़ी।
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हिसार। मिर्चपुर में 12 साल पहले दो पहलवान से शहीद भगत सिंह इंटरनेशनल कुश्ती एकेडमी शुरू हुई थी। एक साल के अंदर 17 पहलवानों ने अभ्यास करना शुरू कर दिया। जब पहलवानों के पदक आने शुरू हुए तो एकेडमी में खिलाड़ियों की संख्या बढ़नी शुरू हो गई। आज इस एकेडमी में 200 पहलवान देश के लिए पसीना बहा रहे हैं। इनमें से 70 पहलवान राष्ट्रीय स्तर पर दाव-पेंच दिखा चुके हैं। वहीं, 30 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय स्तर के पहलवान हैं। इतना ही नहीं, 12 पहलवानों ने खेल के दम पर सरकारी नौकरी हासिल की। आज कोई रेलवे तो कोई आर्मी में सेवाएं दे रहा है। इस एकेडमी को संचालक अजय ढांडा चला रहे हैं।
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अर्जुन अवॉर्डी अंशु मलिक अंतरराष्ट्रीय स्तर की पहलवान है। दो साल पहले अंशु ने सीनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप में रजत पदक जीता था। इसी प्रकार नेशनल चैंपियनशिप में मंजू सोना जीत चुकी हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर की चैंपियनशिप में भी दाव-पेंच दिखा चुकी हैं। वहीं, पिछले साल दीपक नेहरा ने कॉमनवेल्थ गेम्स में कांस्य पदक पर कब्जा किया था। 2022 में अनूज महला ने वर्ल्ड रैंकिंग सीरिज में रजत पदक जीता। विक्की हुड्डा एशियन गेम्स में दमखम दिखा चुका है।
एकेडमी की खासियत
यह एकेडमी चार एकड़ में बनी हुई है। संचालक अजय ढांडा की मानें तो पूरे भारत में कुश्ती की 12 एकेडमियां खेलो इंडिया से एडोप्ट हैं। इसमें ग्रामीण एरिया की उनकी एकेडमी भी शामिल है। एकेडमी में छह मैट का कुश्ती हाल है। फिजियोथेरेपी, इंडोर हॉल से लेकर एसी की सुविधा है। यहां के पहलवानाें के प्रदर्शन को देखते हुए आज एकेडमी में राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश, यूपी, महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों के पहलवान दाव-पेंच सीख रहे हैं। खास बात है कि जब भी इंटरनेशनल स्तर पर कोई टूर्नामेंट होता है तो इस एकेडमी के तीन से चार खिलाड़ी भाग लेते हैं।
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इस तरह होता है टूर्नामेंट के लिए पहलवानाें का चयन


यदि स्टेट स्तर की सरकारी चैंपियनशिप होती है तो उसमें जिला स्तर के विजेता पहलवान दमखम दिखाएंगे। इसी प्रकार राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में स्टेट के विजेता पहलवान भाग लेंगे। वहीं, ओपन ट्रायल में खिलाड़ी सीधा स्टेट में भी भाग ले सकते हैं। सबसे ज्यादा खिलाड़ी भी हरियाणा से ही होते हैं।

मैं चार साल से कुश्ती के दाव-पेंच सीख रही हूं। दो बार नेशनल में स्वर्ण पदक जीत चुकी हूं। मेरा सपना अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप से लेकर ओलंपिक में देश के लिए गोल्ड मेडल जीतना है। हम खेल को चुनकर अपना बेहतर कॅरिअर बना सकते हैं। खेल से शारीरिक विकास के साथ मानसिक विकास भी होता है।
- मानसी लाठर, पहलवान

अब तक तीन नेशनल खेल चुकी हैं। एक में रजत और एक में कांस्य पदक हासिल किया। तीन साल पहले कुश्ती से अपने कॅरिअर की शुरुआत की थी। सुबह-शाम पांच से छह घंटे अभ्यास कर रही हूं। एकेडमी में बेहतरीन सुविधाएं दी जा रही हैं। इसका कारण आज दूसरे राज्यों के खिलाड़ी यहां रहकर अभ्यास करते हैं।
- गरिमा ढांडा, पहलवान
नेशनल चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीत चुकी हूं। इसे गोल्ड में बदलने का सपना पूरा करूंगी। मेरा सपना ओलंपिक में देश को पदक दिलाना है। मैं तीन साल से अभ्यास कर रही हूं। एकेडमी में अच्छा माहौल है। हर सुविधाओं पर ध्यान दिया जा रहा है। आज एकेडमी के पहलवान देश ही नहीं, बल्कि विदेश में भी पदक जीत नाम चमका रहे हैं।
अंशिका ढांडा, पहलवान
किर्गिस्तान में चल रही सीनियर एशिया चैंपियनशिप में फ्री स्टाइल में मैंने कांस्य पदक जीता है। मैं छह साल से अभ्यास अभ्यास कर रहा हूं। अब मेरा सपना ओलंपिक खेलना है। कोच अजय ढांडा खिलाड़ियों को नई-नई तकनीक बताते हैं। इससे प्रदर्शन में सुधार भी होता है।
- विकी हुड्डा, पहलवान

मैं शुरू से ही एकेडमी से जुड़ा हुआ है। संचालक एवं कोच अजय ढांडा के साथ ही खिलाड़ियों को अभ्यास करवा रहा हूं। आज एकेडमी के खिलाड़ियाें ने देश में अपनी अलग पहचान बनाई है। खुशी की बात है कि पदक की बदौलत आज कई पहलवान विभिन्न सरकारी विभागों में सेवाएं दे रहे हैं।
- जयभगवान लाठर, सेवानिवृत्त डिप्टी कमाडेंट, सीआरपीएफ
12 साल से एकेडमी चल रही हैं। एकेडमी में अभ्यास करने वाले खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय स्तर से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की झोली में पदक डाले हैं। खिलाड़ियाें की सुविधाओं से लेकर खेल पर फोेकस रहता है।खास बात है कि दूसरे राज्यों के पहलवान भी यहां अभ्यास करते हैं। दो पहलवान से शुरू हुई एकेडमी में आज 200 खिलाड़ी अभ्यास कर रहे हैं।
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- अजय ढांडा, संचालक, शहीद भगत सिंह इंटरनेशनल कुश्ती एकेडमी, मिर्चपुर
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