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Hisar News: यूपी, उत्तराखंड के बाद गुजरात के घोड़ों में मिला ग्लैंडर्स के लक्षण

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हिसार। घोड़ों के लिए जानलेवा और इंसान को भी प्रभावित करने वाली खतरनाक बीमारी ग्लैंडर्स का प्रकोप थम नहीं रहा है। यूपी, हरियाणा व उत्तराखंड के बाद अब गुजरात के दो घोड़ों में बीमारी के लक्षण मिले हैं। घोड़ों के सैंपल जांच के लिए अश्व अनुसंधान केंद्र हिसार की लैब में आए हैं।
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जनवरी से नवंबर के बीच देश के 10 राज्यों के 33 जिलों से 82 केस सामने आ चुके हैं। सबसे अधिक 46 केस अब तक यूपी से आए हैं। हरियाणा में भी 10 केस मिल चुके हैं। जींद जिले में पहले मिले केस के संपर्क में आए सात अन्य घोड़ों से सैंपल लिया गया है। घोड़ों में होने वाली ग्लैंडर्स बीमारी का कोई इलाज नहीं है। यह रोग जानवर से इंसान में फैलता है। बीमार घोड़ों की देखभाल करने वाले व्यक्ति में संक्रमण का खतरा सर्वाधिक होता है। इसको देखते हुए बीमारी की पुष्टि होते ही घोड़ों को पशु चिकित्सकों की निगरानी में मार दिया जाता है। बीमार घोड़े के मालिक को क्षतिपूर्ति के तौर पर सरकार की तरफ से 25 हजार रुपये की सहायता राशि दी जाती है। इस बीमारी की आरंभिक जांच के लिए हिसार के अश्व अनुसंधान केंद्र ने एक किट विकसित किया है। इस किट से जांच में बीमारी के लक्षण मिलने के बाद पुष्टि के लिए सैंपल अश्व अनुसंधान केंद्र हिसार को भेजा जाता है।
केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. हरिशंकर सिंघा बताते हैं कि जनवरी से नवंबर तक मिले सैंपल की जांच में 82 घोड़ों में बीमारी की पुष्टि हो चुकी है। गुजरात से दो सैंपल आए हैं, जिनकी जांच की जा रही है। इसके अलावा हरियाणा के जींद जिले से टीम भेजकर सात सैंपल मंगाए गए हैं। जींद जिले में पहले बीमारी की पुष्टि हो चुकी है और जिन घोड़ों से सैंपल लिए गए हैं, वे बीमार घोड़े के संपर्क में थे। टीम को जल्द ही राजस्थान के झुंझुनू भी भेजा जाएगा। वहां भी पहले केस मिल चुके हैं।
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वृहद अभियान के लिए प्रदेश सरकारों को भेजा गया पत्र
अश्व अनुसंधान केंद्र हिसार के निदेशक डॉ. यशपाल शर्मा ने बताया कि ग्लैंडर्स बीमारी का अभी तक कोई उपचार नहीं है। लिहाजा समय से जांच कराकर घोड़ों को सुरक्षित तरीके से मारना ही एकमात्र विकल्प है। फिर भी अश्व पालक जांच में देरी करते हैं। कई जगह ऐसे मामले सामने आए हैं, जबकि बीमारी में पुष्टि के बाद अन्य घोड़ों की जांच तक को अश्व पालक तैयार नहीं होते, जबकि टीम भेजकर जांच कराने में अन्य घोड़ों में भी बीमारी के लक्षण मिलते हैं। राज्य सरकारों को इस आशय का पत्र भेजा गया है कि अभियान चलाकर वृहद स्तर पर घोड़ों की जांच कराएं, जिससे कि बीमारी को शुरुआत में ही फैलने से रोका जा सके।
अब तक यहां-यहां मिले केस
उत्तरप्रदेश में 46 केस मिले। आगरा, अलीगढ़, बागपत, बहराइच, बिजनौर, गौतमबुद्घ नगर, गोंडा, हरदोई, कौशांबी, प्रयागराज, लखीमपुर खीरी, लखनऊ, महराजगंज, मुरादाबाद, श्रीवास्ती व सीतापुर।
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हरियाणा में 10 केस आए : फरीदाबाद, झज्जर, जींद, रोहतक, सिरसा।
उत्तराखंड में 8 केस : बागेश्वर, देहरादून।
हिमाचल प्रदेश में 4 केस : कुल्लू।
जम्मू में 1 केस : उधमपुर।
मध्य प्रदेश में 2 केस : शिवपुरी।
महाराष्ट्र में 1 केस : सोलापुर।
गुजरात में 4 केस : अहमदाबाद, आनंद।
आंध्र प्रदेश में 2 केस : गुंटूर।
राजस्थान में 4 केस : झूंझुनू, जयपुर, अलवर।
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