हिसार में दास्तान-ए-अंबाला नाटक का मंचन करते कलाकार।
हिसार। अभिनय रंगमंच की ओर से आयोजित दस दिवसीय रंग आंगन में आखिरी दिन रियाज स्टूडियाे में दास्तान-ए-अंबाला नाटक का मंचन किया गया। 7 फरवरी से इस आयोजन की शुरुआत हुई थी। रोजाना एक या दो नाटक का मंचन किया गया। भारत सरकार के सांस्कृतिक मंत्रालय, कला एवं संस्कृति विभाग हरियाणा, हरियाणा कला परिषद व संस्कार भारती के तत्वावधान में यह आयोजन किया गया।
अतुल लंगाया द्वारा अभिनीत नाटक वैष्णव की फिसलन का भी मंचन हुआ। इस नाटक के माध्यम से बताया गया है कि आज़ादी की पहली लड़ाई में अंबाला का क्या योगदान था, आज़ादी की पहली लड़ाई की चिंगारी अंबाला से फूटी ना कि मेरठ से। इस नाटक का पहला मंचन अंबाला में किया गया था। अभिनय रंगमंच के कलाकारों ने इस नाटक को तैयार किया है। इस नाटक का लेखन यशराज शर्मा ने किया है। नृत्य संरचना डॉ. राखी दूबे और संदीप नागर द्वारा की गई है। सह निर्देशन स्नेहा बिश्नोई द्वारा किया गया है। संगीत साहिल और प्रकाश व्यवस्था निपुण कपूर द्वारा की गई है।
पहला नाटक वैष्णव की फिसलन धार्मिक पाखंड को दर्शाता एक व्यंग्य है। धर्म के नाम पर अगर किसी चीज की मनाही हो लेकिन उसे करना जरूरी हो तो इन्सान कोई न कोई तरीका ढूंढ लेता है। वो अपने आप को समझाने के ऐसे-ऐसे उपाय खोज लेता है कि उन चीजों में भी धर्म और ईश्वर ढूंढ लेता है। अभिनय रंगमंच के अध्यक्ष मनोज बंसल ने बताया कि रंग आंगन उत्सव का आयोजन बेहद शानदार रहा। अगले वर्ष और भी बेहतरीन नाटक खेलने का संकल्प लेकर कलाकार विदा हो गए।