हिसार। खेलों को बढ़ावा देने के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन हकीकत कुछ और है। हैरानी की बात है कि पिछले पांच साल से खिलाड़ियों को खेलों का सामान ही नहीं मिला है। खेल विभाग के पास फुटबाल, बॉक्सिंग रिंग, वुशू और जूडो के मैट से लेकर साइकिल तक स्टॉक में नहीं है।
जबकि साइक्लिंग का प्रभुवाला स्थित राजीव गांधी खेल स्टेडियम और हिसार के महाबीर स्टेडियम में सेंटर चल रहा है। ऐसे में बिन खेल सामान के खिलाड़ी कैसे चैंपियन बनेंगे। खेलों का सामान कब तक पहुंचेगा इसके बारे में खेल अधिकारी भी नहीं बता पा रहे हैं। खिलाड़ियों को जल्द सामान देने का आश्वासन ही दिया जा रहा है। महाबीर स्टेडियम में वुशू, बॉक्सिंग, साइक्लिंग का सेंटर चल रहा है, जबकि मंगाली के गवर्नमेंट गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल में फुटबाल का सेंटर है।
मंगाली के गवर्नमेंट गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल में 100 से ज्यादा बेटियां पदक के लिए पसीना बहा रही हैं। पिछले एक साल से खेल विभाग की ओर से उन्हें फुटबाल तक नहीं मिली है। जब खेल विभाग से उम्मीद टूटी तो गांव के लोग आगे आए और बेटियों को फुटबाल खरीदकर दी। वहीं बेटियां रुपये एकत्रित कर फुटबाल खरीदकर अभ्यास कर रही हैं। खेल विभाग की ओर से वर्ष 2019 में खेलों का सामान मिला था। उसके बाद से केवल इंतजार ही चल रहा है।
कई बार भेजी जा चुकी है डिमांड
विभाग की ओर से खेलों के सामान को लेकर कई बार पंचकूला मुख्यालय को डिमांड भी भेजी गई। रिमाइंडर भी भेजा जा चुका है। कुछ माह पहले संबंधित खेल के कोच को मुख्यालय बुलाकर सैंपल भी दिखाए गए थे, लेकिन सामान कब पहुंचेगा, इसको लेकर स्थानीय अधिकारियों को भी नहीं पता।
फुटबाल, जूडो और वुशू के मैट, बॉक्सिंग रिंग और साइकिल नहीं है। इसके लिए काफी समय पहले से डिमांड भेजी हुई है। - कृष्ण कुमार, क्लर्क, खेल विभाग
मेरे ज्वाइन करने से पहले ही खेल के सामान की डिमांड भेजी हुई है। सामान खरीदा जा रहा है। जल्द ही खिलाड़ियों को सामान मिलेगा। - नरेश कुमार, जिला खेल अधिकारी
मैं चार साल से फुटबाल का अभ्यास कर रही हूं। स्कूली नेशनल में स्वर्ण पदक जीत चुकी हूं, लेकिन हमारे पास फुटबाल की कमी है। करीब छह माह पहले हम सभी लड़कियां रुपये एकत्रित कर फुटबाल लाई थी। एक अच्छी फुटबाल की कीमत एक हजार रुपये से शुरू होती है। ऐसे में खेल विभाग की ओर से बाल मुहैया करवाई जाए।
- सुमन, नेशनल मेडलिस्ट, फुटबाल
खेल विभाग की ओर से काफी समय से फुटबाल नहीं मिली हैं। ऐसे में फुटबाल खरीदने के लिए खुद ही रुपये जुटाने पड़ते हैं, जबकि स्कूल के मैदान पर काफी लड़कियां अभ्यास करने आती हैं। जब तक फुटबाल नहीं मिलेगी तो कैसे आगे बढ़ सकेंगे। सात साल पहले मैंने फुटबाल से अपने कॅरिअर की शुरुआत की थी। - वैशाली, नेशनल मेडलिस्ट, फुटबाल
फुटबाल खेल की किट महंगी आती है। कभी फुटबाल खत्म हो जाती है तो कभी जूते फट जाते है। परिवार की ऐसी स्थिति नहीं है कि वह हमें किट खरीदकर दे सके। ऐसे में खेल विभाग को खिलाड़ियों की सुविधा पर ध्यान देने की जरूरत है। मंगाली में काफी लड़कियां नेशनल स्तर तक पदक जीत चुकी हैं इसके बावजूद खेल का सामान नहीं मिल रहा है। - शर्मिला, नेशनल मेडलिस्ट, फुटबाल