चरखी दादरी। बोर्ड परीक्षाओं से विश्वविद्यालय स्तर तक के परीक्षा परिणाम में जिले की बेटियां बेटों को पछाड़ रहीं हैं। कमोबेश यही स्थिति खेल मैदान की भी है। बेटियां कई जगह बेटों से ज्यादा मुकाम हासिल कर परिवार का नाम रोशन कर रहीं हैं। इसकी नजर पेश करने के बाद भी चरखी दादरी जिले में लिंगानुपात की स्थिति वर्ष 2023 में फिर से बिगड़ी है। वर्ष 2022 में दादरी जिला प्रदेश में दूसरे और वर्ष 2021 में सिरमौर रहा था लेकिन पिछले वर्ष निराशाजनक आंकड़ों के कारण जिला सबसे निचले पायदान पर आ गया।
जानकारों के मुताबिक अगर बेटियों को उनका दिलाना है तो सबसे पहले लिंगानुपात के आंकड़े सुधारने होंगे। ये काम अकेला विभाग या प्रशासन नहीं कर सकता। लिंगानुपात का गिरा ग्राफ ऊपर लाने के लिए समाज को भी अपना दायित्व निभाना होगा। हालांकि ऐसा कतई नहीं कि प्रशासन भी पूर्णतया समाज पर निर्भर रहे। प्रशासन का भी सजगता और सतर्कता बरतते हुए भ्रूण लिंग जांच करवाकर बेटियों को गर्भ में मरवाने वालों पर शिकंजा कसना जरूरी है।
दादरी जिले का महिला एवं बाल विकास विभाग और स्वास्थ्य विभाग वर्ष 2020 में भिवानी से अलग हुआ। तब जिले का लिंगानुपात 887 था। वर्ष 2023 में लिंगानुपात 897 रहा। इन चार वर्षों में महज 10 अंकों की बढ़ोतरी को संतोषजनक नहीं माना जा रहा।
एक साल में सात से आठ बार मारे जा रहे छापे
भ्रूण के लिंग की जांच करवाने वाले गिरोह का भंडाफोड़ करने के लिए स्वास्थ्य विभाग नियमित अंतराल पर छापे मारता है। एक साल में औसतन सात से आठ बार यह कार्रवाई की जाती है लेकिन छापे में कई बार सफलता नहीं भी मिल पाती। हालांकि दादरी स्वास्थ्य विभाग की टीम ने प्रदेश से बाहर तक दबिश देकर भ्रूण लिंग की जांच करवाने वाले गिरोह का खुलासा किया है।
- वर्ष 2020 से 2023 तक तक ये रहा जिले का लिंगानुपात
साल - लिंगानुपात
वर्ष 2020- 887
वर्ष 2021- 904
वर्ष 2022- 933
वर्ष 2023- 897
हर साल आठ हजार बच्चे लेते हैं जन्म
दादरी जिले में हर साल करीब आठ हजार बच्चे जन्म लेते हैं। इनमें से पांच हजार बच्चों का जन्म जिले के सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में होता है जबकि तीन हजार का जन्म दादरी या अन्य शहरों के निजी अस्पतालों में होता है। पिछले वर्ष एक हजार लड़कों पर 897 लड़कियां ही जन्मीं और पूरे साल में लड़कों से करीब 850 लड़कियां कम पैदा हुईं।
नजीर : कमोद में घर के बाहर बेटियों के नाम से लगी है नेम प्लेट
बेटियों को बचाने के मामले में कमोद की ओर से चार साल पहले पेश की गई नजीर को आज भी सराहा जा रहा है। इस गांव में सामूहिक रूप से घरों के बाहर बेटियों की नेम प्लेट लगाई गई। ऐसा करने वाला कमोद जिले का इकलौता गांव है।
वर्ष 2022 के मुकाबले वर्ष 2023 में दादरी जिले के लिंगानुपात का ग्राफ नीचे आया है। इसकी भरपाई इस वर्ष की जाएगी। विभाग की ओर से जागरूकता मुहिम समेत सभी प्रयास तेज किए जाएंगे। - गीता सहारण, सीडीपीओ, दादरी।
भ्रूण के लिंग की जांच कराने वाले गिरोह की धरपकड़ के लिए नियमित अंतराल पर दबिश दी जाती है। प्रदेश से बाहर जाकर भी टीम ने गिरोह से जुड़े लोगों को पकड़ा है। भविष्य में इस प्रयास में और तेजी लाई जाएगी। - डॉ. नरेंद्र, डिप्टी सीएमओ एवं नोडल अधिकारी, पीएनडीटी।
लिंगानुपात सुधारने के लिए किए जा चुके प्रयास
गांवस्तर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए।
भ्रूण लिंग जांच करवाने वालों की धरपकड़ के लिए दबिश दी।
आंगनबाड़ी केंद्र पर बेटियों का सामूहिक जन्मदिन मनाया गया।
जहां लिंगानुपात कम था और वहां जागरूकता अभियान चलाया।
कन्या जन्म पर जच्चा-बच्चा को स्वास्थ्य केंद्र पर सम्मानित किया।