हिसार की कार्यशाला में प्रतिभागियों को संबोधित करते कुलपति प्रो. बीआर कांबोज।
हिसार। हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (एचएयू) में मोरिंगा की क्षमता को पहचानना : विश्व स्वास्थ्य और जलवायु परिवर्तन के प्रति सहनशीलता के अवसर विषय पर 10 दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन किया गया। मौलिक विज्ञान एवं मानविकी महाविद्यालय के जैव रसायन विभाग की तरफ से आयोजित इस कार्यशाला का शुभारंभ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बीआर काम्बोज ने किया। उन्होंने कहा कि एचएयू और न्यूजीलैंड की मैसी यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक मोरिंगा पर संयुक्त रूप से शोध कार्य करेंगे। इस कार्यशाला में 25 प्रतिभागी भाग ले रहे है, जिसमें न्यूजीलैंड, डेनमार्क व आस्ट्रेलिया के प्रतिष्ठित संस्थानों के वैज्ञानिक अपना व्याख्यान देंगे।
कुलपति ने बताया कि जलवायु परिवर्तन एवं मौसम में हो रहे बदलाव के कारण मोरिंगा के बीज व पत्तियों में टैनिन और एंटीओक्सीडेंट प्रोपर्टीज पर पड़ने वाले प्रभाव पर रिसर्च किया जाएगा। इसके लिए हिमालय रीजन, उत्तराखंड व दक्षिणी क्षेत्र के विभिन्न स्थानों से मोरिंगा के सैंपल भी लिए जाएंगे। अनुसंधान निदेशक डॉ. राजबीर गर्ग ने बताया कि मोरिंगा को ‘ड्रमस्टिक’ या सहजन के नाम से भी जाना जाता है। भारत और अफ्रीका के कुछ हिस्सों में इसकी खेती होती है। इसकी पत्तियां प्रोटीन का एक बड़ा स्रोत है और इसमें सभी महत्वपूर्ण एमीनो एसिड भी होते हैं। मोरिंगा की पत्तियां शरीर में ऊर्जा बढ़ाने के साथ-साथ डायबिटीज, इम्युन सिस्टम, हड्डियों और लीवर सहित विभिन्न बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल की जाती हैं।
विभागाध्यक्ष डॉ. जयंती टोकस ने बताया कि मोरिंगा पर शोध के लिए विश्वविद्यालय के मौलिक विज्ञान एवं मानविकी महाविद्यालय के दो शोधार्थी मैसी यूनिवर्सिटी का दौरा करेंगे। इस अवसर पर मौलिक विज्ञान एवं मानविकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. राजेश गेरा, डॉ. अक्षय भूकर सहित सभी महाविद्यालयों के अधिष्ठाता, निदेशक, अधिकारी, शिक्षक, गैर शिक्षक, प्रतिभागी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।