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लुवास में जांचे जाएंगे पशुओं में अफ्रीकन स्वाइन फ्लू के सैंपल

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हिसार। केंद्र सरकार के मत्स्य पालन, पशु पालन और डेयरी मंत्रालय ने लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय को अफ्रीकन स्वाइन बुखार के सैंपल की टेस्टिंग की अनुमति प्रदान कर दी है। अभी तक अफ्रीकन स्वाइन फ्लू की जांच के लिए सैंपल को राष्ट्रीय उच्च रोग पशु रोग संस्थान भोपाल लैब में भेजे जाते थे।
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अफ्रीकन स्वाइन फ्लू के लिए परीक्षण सुविधाओं के विकेंद्रीकरण की अवधारणा के साथ केंद्र सरकार ने लुवास को यह मंजूरी दी है। लुवास के कुलपति प्रो. विनोद कुमार वर्मा ने बताया कि लुवास को केंद्र सरकार की ओर से अनुमति मिल चुकी है। इस जांच केंद्र के स्थापित होने से जांच शीघ्र हो सकेगी। सैंपल के जल्द रिजल्ट मिलने से रोग को प्रदेश में फैलने से रोका जा सकेगा। अनुसंधान निदेशक डॉ. नरेश जिंदल ने बताया कि जांच करने की प्रक्रिया जल्द प्रारंभ होगी। उन्होंने बताया कि लुवास में यह जांच रियल टाइम पीसीआर से होगी। आईसीएआर के मानकों के अनुसार यह जांच होगी।
लुवास के पशु चिकित्सा जन स्वास्थ्य एवं महामारी विभाग के अध्यक्ष के कार्यालय में यह सैंपल जमा करवा सकते हैं। लुवास भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान भोपाल को भी सैंपल की रिपोर्ट भेजेगा। रिपोर्ट की एक प्रति राज्य के पशुपालन विभाग को भेजी जाएगी।
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ये हैं बीमारी के लक्षण
लुवास के पशु वैज्ञानिकों ने बताया कि अफ्रीकन स्वाइन फ्लू घरेलू और जंगली सुअरों में फैलने वाली संक्रामक वायरल बीमारी है। अफ्रीकी स्वाइन फीवर असफारविरिडे फैमिली के लार्ज डीएनए वायरस से फैलती है। इसके लक्षण सुअर की स्किन पर भी दिखते हैं, संक्रमित होने पर वजन में कमी होना, बुखार का तेजी से बढ़ना, त्वचा पर अल्सर दिखना और भूख में कमी आना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, मानव में यह संक्रमण नहीं फैलता है। संक्रमित सुअर को अलग रखा जाना चाहिए।
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