हांसी। संतों का संग पारस पत्थर से भी बढ़कर है क्योंकि पारस के संपर्क में आने से लोहा सोना तो हो जाता है लेकिन पारस नहीं हो पाता। लेकिन संत तो अपनी संगति में आए जीव को अपने जैसा ही बना लेते हैं। ये बात संत कंवर महाराज ने हांसी के भिवानी रोड पर स्थित राधा स्वामी आश्रम में साध संगत को कही।
कंवर साहेब ने कहा कि बैसाखी के अवसर पर ही गुरु गोविंद सिंह ने पंज प्यारे का उद्गोष करके खालसा की स्थापना की थी। उन्होंने सिख समुदाय के सदस्यों से गुरु और भगवान के लिए खुद को बलिदान करने के लिए आगे आने के लिए कहा था। उन्होंने कहा कि बैसाखी कृषि कार्यों से जुड़े और भक्ति मार्ग पर चलने वालों के लिए पवित्र दिन है।
गुरु महाराज ने कहा कि आज के समय रिश्तों की कद्र घटती जा रही है। ऐसे में इंसान के लिए संतोंं का सत्संग ही एकमात्र सहारा है। उन्होंने कहा कि अपने कर्मों को सुधारो क्योंकि कर्म आपका पीछा कभी नहीं छोड़ता। कर्म सुधरेंगे गुरु की संगत और सोहबत से।