सियासी कद बढ़ाने में पंचायती चुनाव अहम भूमिका निभाता है। पूर्व सीएम भजनलाल समेत कई दिग्गज इसी चुनाव से शिखर तक पहुंचे। हरियाणा विधानसभा के डिप्टी स्पीकर रणबीर गंगवा भी वैसे ही नेताओं में शुमार हैं और नवोदित नेताओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने गांव गंगवा में पंच का चुनाव जीतकर अपने राजनीतिक कॅरिअर की नींव रखी थी।
हिसार में वर्ष 1990 में महज 26 साल की उम्र में रणबीर गंगवा ने अपने परिवारजनों के कहने पर गंगवा गांव में पंच का चुनाव लड़ा था। पंचायत चुनाव की जीत से मिले हौसले के बाद रणबीर गंगवा ने जिला परिषद से लेकर विधानसभा का चुनाव लड़ा व डिप्टी स्पीकर के पद तक पहुंचे।
पंचायती चुनाव में काफी युवा अपनी दावेदारी जता रहे हैं। इन युवाओं के लिए डिप्टी स्पीकर रणबीर गंगवा का जीवन संघर्ष काफी प्रेरणादायक है। डिप्टी स्पीकर रणबीर गंगवा ने राजकीय महाविद्यालय हिसार से यूजी की डिग्री हासिल की। इसके बाद वर्ष 1990 में उन्होंने पहला चुनाव पंच पद के लिए लड़ा और जीत हासिल की।
पंच का कार्यकाल पूरा होने के बाद उन्होंने सरपंच का चुनाव न लड़ते हुए वर्ष 2000 में सीधा जिला परिषद का चुनाव लड़ा। हालांकि इस चुनाव में उनको हार का सामना करना पड़ा, लेकिन हिम्मत नहीं हारी। वर्ष 2005 में एक बार फिर जिला परिषद का चुनाव लड़ा और जीत दर्ज कर वाइस चेयरमैन की कुर्सी पर बैठे।
इसके बाद वे सुर्खियों में आ गए थे। वर्ष 2009 में नलवा को विधानसभा क्षेत्र बनाया गया। रणबीर गंगवा ने 2009 में इंडियन नेशनल लोकदल से नलवा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा और हार का सामना करना पड़ा। उसके बाद 2010 में उनको राज्यसभा सांसद मनोनीत किया गया।
इसके बाद वर्ष 2014 में इनेलो की ओर से नलवा विधानसभा क्षेत्र से ही चुनाव लड़कर जीत हासिल की। वर्ष 2019 में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी ज्वाइन करके एक बार फिर नलवा से विधायक बने। इस जीत के बाद उनको हरियाणा विधानसभा का डिप्टी स्पीकर बनाया गया।
पढ़े-लिखे समझदार युवाओं की चुनाव में भागीदारी जरूरी
हमारा लोकतांत्रिक देश है। भारतीय जनता पार्टी ने पंचायत चुनाव में शैक्षणिक योग्यता लागू की है। अब पढ़े लिखे व समझदार युवाओं को चुनाव में भागीदारी करनी जरूरी है, क्योंकि युवा देश का भविष्य हैं। युवा ही देश व समाज की दिशा तथा दशा निर्धारित करते हैं।
- रणबीर गंगवा, डिप्टी स्पीकर, हरियाणा