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Hisar News: अंग्रेजाें की कैद में रहे रामजीलाल को शहीद मान बैठे थे, आजादी के बाद लौटे तो गांव में छाई खुशी

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स्वतंत्रता सेनानी रामजीलाल। 
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हिसार। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद फौज के सिपाही रहे रामजीलाल लंबे समय तक अंग्रेजों की कैद में रहे। परिवार वालों को लगा वे शहीद हो चुके हैं। भारत की आजादी के बाद के सभी को रिहा किया गया तो रामजीलाल भी अपने घर पहुंचे। उन्हें जिंदा देखकर पूरे गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। रामजीलाल के दोहते श्रवण शर्मा कुलाना ने बताया कि नाना रामजीलाल 1942 में आजाद हिंद फौज में भर्ती हुए थे। उनका मकसद एक ही था देश की आजादी। सुभाष चंद्र बोस जब हिसार आए तब उनका भाषण सुनकर नाना के मन में देश की आजादी का जज्बा जागा। वे नेताजी को अपना आदर्श मानते थे। हिटलर की मौत के बाद तथा जापान के आत्मसमर्पण के बाद अंग्रेजों ने सभी सैनिकों को बंदी बना लिया। गांव के लोग यही समझने लगे कि रामजीलाल शहीद हो चुके हैं। आजादी के बाद सबको रिहा कर दिया गया। जब वे अपने गांव बलियाली पहुंचे तो गांव में खुशी छा गई। बाद में रामजीलाल और उनका परिवार सलेमगढ गांव में आकर बस गया। 9 अगस्त 1996 में सड़क हादसे में उनका निधन हो गया। रामजीलाल के एक लड़का और पांच लड़कियां हैं। श्रवण शर्मा का कहना है कि स्वतंत्रता सेनानियों की प्रथम पीढ़ी को उत्तराखंड की तर्ज पर पेंशन दी जानी चाहिए
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