नारनौंद। ऐतिहासिक गांव राखी गढ़ी की बेटी ने पंजाब ज्यूडिशियल सर्विस के परिणाम में 50वां रैंक हासिल किया और उसकी नियुक्ति पंजाब में ही जज के पद पर हुई है। नंदिता शर्मा बुधवार को जज बनकर पहली बार अपने पैतृक गांव राखी गढ़ी में पहुंची तो ग्रामीणों ने भी बेटी को पलकों पर बैठाया। राखी गढ़ी निवासी नंदिता शर्मा मात्र 23 वर्ष की हैं। उसने 2022 में पंजाब ज्यूडिशियल सर्विस में फॉर्म भरा था और परीक्षा के बाद 11 अक्तूबर को परिणाम आया तो उसने 50वां रैंक हासिल कर सबसे कम उम्र की जज बनने का ऐतिहासिक कार्य कर दिया।
इस खुशी में बुधवार को राखी बाराह खाप की तरफ से खाप के चबूतरे पर नंदिता का जोरदार स्वागत किया गया। खाप के प्रधान रतन मिलकपुर ने खाप की तरफ से उनको स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। नंदिता शर्मा ने बताया कि वह फिलहाल पंचकूला में रहती है और उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी के यूआईएलएस से कानून की पढ़ाई की है। उसकी माता प्रीति गृहणी है और पिता जगदीप प्रॉपर्टी डीलर का काम करते हैं। जब वह दसवीं कक्षा में पढ़ती थी तो एक कार्यक्रम में जज को मुख्य अतिथि बनाया गया था। उसको देखकर वह प्रभावित हो गई और उसी दिन ठान लिया था कि वह बड़ी होकर जज बनेगी। पिछले ढाई साल से परीक्षा के लिए तैयारी कर रही थी और पहले ही प्रयास में इस साल परीक्षा पास कर ली। वह कोचिंग के अलावा हर रोज 10 से 12 घंटे पढ़ाई करती थी। नंदिता नेे युवाओं से आह्वान करते हुए कहा कि वह नशे से दूर रहें और अपने लक्ष्य को निर्धारित करें तभी वो मंजिल प्राप्त कर सकते हैं।
इस दौरान खाप के पूर्व प्रधान सुरेश कोथ, मास्टर राजकुमार, मास्टर हरकेश, रमेश श्योराण, दिनेश श्योराण, रामनिवास, मास्टर जयबीर कोथ, सरपंच अशोक मिर्चपुर व रामफल जांगड़ा आदि मौजूद रहे।
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परदादा रामेश्वर दत्त बने थे नारनौंद से पहले विधायक
नंदिता के पिता जगदीप अत्री ने बताया कि उनके दादा 1966 में हरियाणा प्रदेश अलग होने के बाद हुए पहले विधानसभा चुनाव 1967 में नारनौंद विधानसभा से विधायक बने थे। उनके विधायक बनने के बाद से ही उनका परिवार अपने पैतृक गांव राखीगढ़ी से पंचकूला में रहने लग गया था। वह प्रॉपर्टी डीलर का काम करते हैं लेकिन बेटी की पढ़ाई के लिए पिछले डेढ़ साल से वह कभी भी अपने ऑफिस नहीं गए। बेटी को पढ़ाई के लिए छोड़ कर आना और रात को पढ़ाई के बाद लेकर आना, इसको ही अपना व्यवसाय बना लिया था ताकि वह अपनी बेटी को कामयाब होता देखें। बेटी ने उनका सपना पूरा कर दिया। पंचकूला में रहने के दौरान भी उन्होंने अपने पैतृक गांव राखी गढ़ी में आना-जाना नहीं छोड़ा।
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पहली बार में ही किया मुकाम हासिल :
नंदिता शर्मा ने बताया कि पंचकूला में ही दोपहर को लाइब्रेरी में जाती थी और रात को 11 बजे तक वही लाइब्रेरी में एकांत में ही पढ़ाई करती थी। इस दौरान माता-पिता, बड़ी बहन व परिवार के सभी सदस्यों ने उसको बहुत साथ दिया। उसने सिर्फ पढ़ाई पर ही अपना पूरा फोकस लगाकर पहली बार में ही यह मुकाम हासिल किया है।
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मोबाइल फोन से बनाई दूरी :
नंदिता शर्मा ने बताया कि उन्होंने इस मुकाम को हासिल करने के लिए लगातार ढाई साल तक कड़ी मेहनत की है। इस दौरान उसने कॉलेज समय से लिए हुए अपने मोबाइल नंबर को भी बंद कर दिया था। उसने सिर्फ एक ऐसा मोबाइल नंबर लिया जो सिर्फ फैमिली या क्लोज फ्रेंड के साथ ही शेयर किया था। सोशल मीडिया से बिल्कुल किनारा कर लिया था। उसका मानना है कि सोशल साइटों पर युवा अपना समय बर्बाद कर रहे हैं। पढ़ाई का जो समय एक बार निकल गया तो वह समय वापस नहीं आता।
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सफल होने के लिए सेल्फ स्टडी और आत्मविश्वास जरूरी :
नंदिता शर्मा ने बताया कि किसी भी परीक्षा में सफल होने के लिए सेल्फ स्टडी और आत्मविश्वास बहुत जरूरी है। जब वह लगातार कुछ समय पढ़ाई करती थी तो उसके बाद वह स्वयं ही अपनी पीठ थपथपाती थी और अपने आप से कहती थी कि हां मैं यह कर सकती हूं। ऐसा करने से उसको काफी हौसला मिलता था।