हिसार। एचएयू के 25वें दीक्षांत समारोह में जिन छह सर्वश्रेष्ठ विद्यार्थियों को राष्ट्रपति के हाथों एएल फ्लेचर स्वर्ण पदक मिला उनमें दो छात्राएं सगी बहनें हैं। आदमपुर की रहने वाली गायत्री और प्रियंका कृषि प्रबंधन के क्षेत्र में नई पहचान बनाना चाहती हैं। इसके अलावा कृषि इंजीनियरिंग के विद्यार्थी विक्रम सिंह किसानों के लिए उपयोगी यंत्र बनाना चाहते हैं। इसके अलावा स्वर्ण पदक पाने वाले विद्यार्थियाें का कहना है कि वे कृषि क्षेत्र में नए प्रयोग कर रहे हैं। एएल फ्लेचर स्वर्ण पदक उन विद्यार्थियों को मिलता है जो शिक्षा के साथ-साथ अन्य गतिविधियों में सर्वश्रेष्ठ होते हैं।
कृषि प्रबंधन से आएगा सुधार : ज्योत्सना
मंडी आदमपुर की रहने वाली ज्योत्सना कृषि प्रबंधन क्षेत्र में नए प्रयोग करना चाहती हैं। शिक्षक पिता प्रवीण मेहता व माता प्रेम कुमारी की प्रेरणा से बीएससी कृषि में सर्वश्रेष्ठ विद्यार्थी बनी ज्योत्सना अब एमबीए की डिग्री भी हासिल कर चुकी हैं। फिलहाल एक कंपनी में प्रबंधक पद पर कार्यरत ज्योत्सना ने बताया कि पढ़ाई के दौरान ही उसे महसूस हुआ कि कृषि क्षेत्र के विकास में प्रबंधन की बहुत जरूरत है। इसीलिए उसने एमबीए की डिग्री ली, जिससे खेती में नए प्रबंध के उपाय खोज सके।
प्रियंका और गायत्री ने पूरे किए माता-पिता के सपने
दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति के हाथाें एएल फ्लेचर गोल्ड मेडल पाने वालों में सगी बहनें प्रियंका चहल व गायत्री चहल भी शामिल रहीं। प्रियंका अब एफसीआई में कार्यरत हैं, वहीं गायत्री अभी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटी हैं। इसके अलावा एक प्राइवेट कंपनी के साथ ढाई साल का कार्य अनुभव भी ले रही हैं। पिता जयवीर सिंह व मां के सपने को दोनों बेटियां ने पूरा करके दिखाया है। राष्ट्रपति के हाथों सम्मान पाकर बेहद खुश इन बेटियों का कहना था कि विश्वविद्यालय स्तर पर सर्वश्रेष्ठ विद्यार्थी का पुरस्कार पाना अपने आप में खास एहसास कराता है।
किसानों के लिए आसान कृषि उपकरण खोज रहे हैं विक्रम
कैमरी गांव निवासी विक्रम सिंह फिलहाल पंजाब नेशनल बैंक में मैनेजर हैं। कृषि इंजीनियरिंग के इस गोल्ड मेडलिस्ट को भी राष्ट्रपति के हाथों पुरस्कार मिला। विक्रम ने बताया कि कृषि क्षेत्र में उनकी शुरू से ही रुचि रही है। बैंक में नौकरी के बावजूद मन में यह भाव रहता है कि किसानों के लिए उपयोगी कृषि उपकरणों की खोज करें, जिससे खेती में सुविधा हो। आज राष्ट्रपति के हाथों पुरस्कार मिलने के बाद यह भावना और प्रबल हो गई है।
शिक्षक बनकर बच्चों को प्रेरित कर रहीं वैलेंटीना
राष्ट्रपति के हाथों पदक पाने वाली वैलेंटीना हिसार की ही रहने वाली हैं। विश्वविद्यालय के रिटायर्ड शिक्षक डॉ. फूल सिंह की पुत्री वैलेंटीना पति कर्नल शिवेंद्र सिंह चौहान के साथ दिल्ली में रहती हैं। एक स्कूल में शिक्षक बन चुकी वैलेंटीना शुरू से ही शिक्षक बनना चाहती थीं। राष्ट्रपति के हाथों पुरस्कार पाने के बाद उनका उत्साह और बढ़ा है। वैलेंटीना का कहना है कि कृषि क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती सहभागिता सुखद है। आने वाले समय में इस क्षेत्र में भी महिलाएं आगे निकलेंगी।
ग्वार की नई प्रजातियों की खोज में लगीं रीना तो उर्वरक प्रबंधन के उपाय खोज रहीं गरिमा
एचएयू के दीक्षांत समारोह में किसानों की तरक्की के लिए शोध कर रहे होनहारों को राष्ट्रपति, राज्यपाल व मुख्यमंत्री के भाषणों ने काफी प्रभावित किया। गरिमा दहिया खेती में उर्वरक प्रबंधन विषय पर शोध कर रही हैं। वहीं, प्लांट ब्रीडिंग एंड जेनेटिक्स की शोधार्थी रीना सहारण ग्वार की नई प्रजाति खोज रही हैं, तो एग्रोनॉमी में पीएचडी करने वाले सुशील कुमार खरपतवार रोधी दवाओं की खोज में जुटे हैं। इन कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति, राज्यपाल व मुख्यमंत्री के प्रोत्साहन से कृषि क्षेत्र में नए शोध करने की इच्छा और प्रबल हुई है।
हिसार क्षेत्र के खेतों में नाइट्रोजन व जिंक की कमी : गरिमा
सोनीपत की रहने वाली गरिमा दहिया को दीक्षांत समारोह में अलग-अलग श्रेणी में तीन स्वर्ण पदक दिए गए। शोध कर रहीं गरिमा ने बताया कि हिसार क्षेत्र के खेतों में नाइट्रोजन व जिंक की कमी है। उपज को बनाए रखने के साथ-साथ मृदा स्वास्थ्य के लिए जरूरी है कि रसायनिक उर्वरकों का संतुलित प्रयोग किया जाए। कृषि विशेषज्ञों के सामने कई प्रकार की नई चुनौतियां हैं। आज के कार्यक्रम से कृषि क्षेत्र में शोध करने का उत्साह बढ़ा है।
ग्वार की अच्छी उपज पा रहे किसान : रीना
हिसार की रहने वाली रीना सहारण जेनेटिक्स एंड प्लांट ब्रीडिंग विषय से संबंधित हैं। इन्होंने गेहूं के पीला रतुआ रोग रोधी किस्म की खोज पर अपना शोध पूरा किया है। फिलहाल ग्वार की नई प्रजाति खोजने में लगी रीना ने बताया कि दक्षिणी हरियाणा व राजस्थान में ग्वार की अच्छी उपज होती है। फिलहाल ग्वार की नई प्रजाति खोज रहे हैं, जिससे किसान अच्छी उपज पा सकें।
गुल्ली-डंडा खरपतवार पर वार जरूरी : सुशील
दीक्षांत समारोह में दो गोल्ड मेडल पाने वाले सुशील कुमार सिरसा जिले के रहने वाले हैं। गेहूं के खरपतवार गुल्ली-डंडा से फसलों को होने वाले नुकसान व उससे बचाव के उपाय विषय पर शोध करने वाले सुशील अब रिसर्च फेलो के तौर पर विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं। सुशील ने बताया कि धान के बाद जिन खेतों में गेहूं की फसल उगाई जाती है, उनमें गुल्ली-डंडा नाम का खरपतवार उगता है। यह फसल की उपज पर 30 प्रतिशत तक असर डालता है। अगर समुचित उपचार न किया जाए तो पूरी उपज प्रभावित करता है।