प्रदेश की सबसे हॉट सीटों में से एक मानी जाने वाली आदमपुर सीट। हरियाणा बनने के बाद पहली बार चुनाव हुए तो हरि सिंह डाबड़ा यहां से विधायक बने थे। इसके बाद 1968 में प्रदेश में दूसरी बार हुए विधानसभा चुनाव में चौधरी भजनलाल ने आदमपुर से बड़ी जीत हासिल की और इसके बाद से आज तक आदमपुर हलका उनके परिवार का राजनीतिक गढ़ रहा है।
पूर्व मुुख्यमंत्री स्वर्गीय चौधरी भजनलाल स्वयं यहां से आठ बार विधायक बने थे। उन्हें हर बार 57 प्रतिशत से अधिक ही मत मिले। उनके अलावा आदमपुर से उनकी पत्नी जसमा देवी एक बार और उनके बेटे कुलदीप बिश्नोई दो बार विधायक रह चुके हैं। यहां के लोगों की चुनावों में रुचि का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि आदमपुर हलके में किसी भी चुनाव में कभी 71 प्रतिशत से कम वोटिंग नहीं हुई।
भजनलाल को मिले थे 77.93 प्रतिशत वोट
आदमपुर हलके में 2005 में हुए विधानसभा चुनाव में चौधरी भजनलाल इतने अधिक मत से जीते थे कि उनके सामने वाले प्रत्याशियों के वोट जोड़कर भी उनके हार के अंतर को आधा भी नहीं किया जा सकता था। भजनलाल को 86993 वोट मिले और उनके प्रतिद्वंद्वी इनेलो के राजेश को 15882 वोट हासिल हुए। भजनलाल को कुल 77.93 प्रतिशत वोट मिले और 71081 मतों के मार्जिन से जीत हासिल की थी। इसके अलावा भजनलाल ने अपने कार्यकाल में आदमपुर से जीतनी बार भी चुनाव लड़ा, उन्हें हमेशा 57 प्रतिशत से 70 प्रतिशत के बीच वोट हासिल हुए।
वर्ष 2009 में हजकां बनने के बाद यहां पहली बार कुलदीप बिश्नोई ने चुनाव लड़ा और वोट प्रतिशत 50 से भी कम हो गया था। उन्हें 56757 वोट मिले और उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी कुलवीर सिंह बेनीवाल ने 39508 वोट हासिल किए।