हिसार। कृषि विश्वविद्यालय में विकसित बेर के फल से गुठली निकालने के यंत्र को भारतीय पेटेंट कार्यालय ने पेटेंट प्रदान किया है। विश्वविद्यालय के कृषि महाविद्यालय के बागवानी विभाग में कार्यरत सहायक प्राध्यापक डॉ. मुकेश कुमार द्वारा डॉ. देवी सिंह व डॉ. राजेंद्र सिंह गोदारा के सहयोग से विकसित किए गए इस यंत्र को पेटेंट अधिनियम 1970 के अंतर्गत 20 साल की अवधि के लिए 408016 संख्या से पेटेंट अनुदत किया गया है।
एचएयू कुलपति प्रो. बीआर कांबोज ने बेर में गुठली होने की वजह से हम इसको छोटे बच्चों, बुजुर्गों व आमजन को देने में परहेज करते हैं। बच्चों में इसकी गुठली के खाने की नली में फसने का भय बना रहता है। बुजुर्ग लोगों के कमजोर दांत टूटने का खतरा रहता है। इनके अतिरिक्त खाते समय बेर की गुठली के साथ इसका गुद्दा भी चिपका रह जाता है जिससे इसमें उपस्थित पोषक तत्व बेकार चले जाते हैं। गुठली को मुंह से निकालकर बार-बार फेंकना भी एक समस्या है। अब बच्चे और बुजुर्ग भी आसानी से बेर खा सकेंगे।
कुलपति प्रो. बीआर कांबोज ने बताया कि इस पेटेंट के साथ विश्वविद्यालय में विकसित की गई विभिन्न प्रौद्योगिकियों पर अब तक मिल चुके पेटेंटों की संख्या बढक़र 20 हो गई है। इनके अतिरिक्त विश्वविद्यालय को 6 डिजाइन पेटेंट, 11 कॉपीराइट और एक ट्रेड मार्क भी प्रदान किए जा चुके हैं।
प्रसंस्करण के लिए बहुत उपयुक्त है यंत्र विश्वविद्यालय के अनुसंधान निदेशक डॉ. जीत राम शर्मा ने कहा कि गुठली निकालने के बाद प्रसंस्करण के लिए बेर का गुद्दा भी आसानी से बनाया जा सकता है। जिससे अच्छी गुणवत्ता की केंडी व मुरब्बा भी बनाया जा सकता है।