कैंट के सामने सर्विस रोड के निर्माण में बाधा बन रही दुकानों को तोड़ने पहुंची जेसीबी।
हिसार। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) को कैंट के सामने बनीं अवैध दुकानों को तोड़ने के लिए शुक्रवार को ड्यूटी मजिस्ट्रेट व पुलिस बल नहीं मिला। हालांकि इस दौरान पहले गिराए गए एक ढाबे के मलबे को हटाने पर एनएचएआई अधिकारियों व स्थानीय निवासियों में बहसबाजी हो गई। ड्यूटी मजिस्ट्रेट व पुलिस बल न मिलने पर प्राधिकरण के अधिकारी लौट आए।
बता दें कि एनएचएआई ने कैंट के सामने अधूरे पड़े सर्विस रोड के निर्माण के बीच में आ रही दुकानों को तोड़ने के लिए 4 व 5 अगस्त को ड्यूटी मजिस्ट्रेट तैनात करने व पुलिस बल उपलब्ध करवाने की मांग की थी। साथ ही प्राधिकरण ने जिला प्रशासन से निशानदेही की रिपोर्ट भी उपलब्ध करवाने को कहा था। इसे लेकर एनएचएआई के अधिकारियों की तरफ से जिला उपायुक्त के नाम एक पत्र लिखा गया था।
सुबह 10 बजे मौके पर पहुंची जेसीबी
दुकानों को तोड़ने को लेकर शुक्रवार सुबह 10 बजे जेसीबी मौके पर पहुंच गई। करीब एक घंटे के बाद एनएचएआई के अधिकारी भी कार्रवाई स्थल पर पहुंच गए। इसके बाद वह ड्यूटी मजिस्ट्रेट व पुलिस बल का इंतजार करने लगे। जब डेढ़ घंटे के बाद भी ड्यूटी मजिस्ट्रेट नहीं पहुंचे तो प्राधिकरण के अधिकारी एसडीएम के पास गए। मगर उस समय एसडीएम उपायुक्त की बैठक में मौजूद थे। इस पर वह वापस कार्रवाई स्थल पर आ गए। यहां आकर उन्होंने मौके पर पड़े ढाबे के मलबे को जेसीबी से हटवाने को कहा। जैसे ही जेसीबी से वह मलबा हटाने की कार्रवाई शुरू की गई तो मौके पर मौजूद कॉलोनी निवासी भड़क गए। इस दौरान प्राधिकरण के अधिकारी व कॉलोनी निवासियों ने बहसबाजी भी होने लगी। कॉलोनी निवासियों का कहना था कि बिना दुकानों को तोड़े वह ढाबे के मलबे को यहां से नहीं हटाने देंगे। मामला बढ़ता देख प्राधिकरण के अधिकारी जेसीबी को लेकर वहां से चले गए।
उपायुक्त से मिले कॉलोनी निवासी
उधर, कॉलोनी निवासी इस मामले को लेकर उपायुक्त से मिले। उपायुक्त ने कहा कि नूंह मामले के कारण पुलिस बल उपलब्ध नहीं हो सका। वहीं अगले दो दिनों तक परीक्षा के कारण पुलिस बल उपलब्ध नहीं हो सकेगा। ऐसे में सोमवार या मंगलवार को अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई हो सकती है।
बिना पुलिस बल के वहां दुकानों को तोड़ना संभव नहीं है। अब जिला प्रशासन को दोबारा से ड्यूटी मजिस्ट्रेट तैनात करने व पुलिस बल उपलब्ध करवाने के लिए पत्र लिखा जाएगा। - विपिन मंगला, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एनएचएआई