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Hisar News: धूल-मिट्टी में पसीना बहाकर पदक ला रहे म्हारे खिलाड़ी

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हिसार महावीर स्टेडियम में दौड़  लगाते खिलाड़ी।
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हिसार। खेलों को बढ़ावा देने के लिए सरकार नई-नई पॉलिसी लागू कर रही है। मगर आज भी खिलाड़ियों को जमीनी स्तर पर सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। महाबीर स्टेडियम में अभ्यास कर रहे खिलाड़ियों व कोच ने कई बार खेल विभाग के अधिकारियों के पास सिंथेटिक ट्रैक बनाने की गुहार लगाई। लेकिन आज भी खिलाड़ी मिट्टी के मैदान पर धूल के बीच पसीना बहाकर अभ्यास करने को मजबूर हैं। हालांकि उनकी मेहनत रंग जाती है। जिले के कई खिलाड़ी इसी मैदान पर दौड़कर गोल्ड मेडल ला चुके हैं। हर साल कोच की ओर से भी सिंथेटिक ट्रैक बनने के लिए डिमांड भेजी जा रही है।
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महाबीर स्टेडियम में एथलेटिक्स का प्रशिक्षण ले रहे खिलाड़ियों का कहना है कि अब तो मिट्टी का मैदान भी दौड़ने लायक नहीं रहा है। मैदान में गड्ढे हो चुके हैं। दौड़ते समय चोट लगने का डर रहता है। कभी भी हादसा हो सकता है। अभ्यास भी पूरी तरह प्रभावित हो रहा है। खिलाड़ियों का कहना है कि बड़े लेवल पर टूर्नामेंट सिंथेटिक ट्रैक पर ही होते हैं। विश्व एथलेटिक्स दिवस हर साल 7 मई को विश्व स्तर पर फिटनेस के महत्व के बारे में युवाओं में जागरूकता फैलाने और एथलेटिक्स में उनकी भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए मनाया जाता है।
सिंथेटिक ट्रैक पर स्पीड़ से दौड़ा जाता है, मगर स्टेडियम में बने मिट्टी के मैदान पर ठीक ढंग से प्रैक्टिस नहीं कर पाते हैं। दौड़ते समय चोट लग सकती है। थोड़ी सी बारिश में यहां पानी भर जाता है। ऐसे में खेल विभाग को खिलाड़ियों की तरफ ध्यान देना चाहिए, ताकि अभ्यास प्रभावित न हो। मैं दो बार नेशनल में स्वर्ण पदक जीत चुका हूं। - बलवंत, नेशनल मेडलिस्ट
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महाबीर स्टेडियम में बना मिट्टी का मैदान भी खेलने लायक नहीं बचा है। दौड़ने में दिक्कत आती है। आज अभ्यास करने के लिए खिलाड़ियों के पास सिंथेटिक ट्रैक तक नहीं बना है। ऐसे में यहां से कैसे बेहतर खिलाड़ी निकलेंगे। मैं तीन बार नेशनल में मेडल जीत चुका है। एथलेटिक्स खिलाड़ियों के लिए सिंथेटिक ट्रैक होना जरूरी है। - कुलदीप, नेशनल मेडलिस्ट

सोमवार को मुख्यालय बातचीत की जाएगी, ताकि खिलाड़ियों को सिंथेटिक ट्रैक की सुविधा मिल सके। यदि सिंथेटिक ट्रैक हो तो खिलाड़ी और भी बेहतर प्रदर्शन कर पाएंगे। - हरमेश चंद्र, कार्यकारी जिला खेल अधिकारी
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