उदयभान त्रिपाठी
हिसार। कृषि विभाग की योजनाओं को किसानों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारियों के अधिकतर पद अभी तक खाली पड़े हैं। मुख्य रूप से एडीओ और तकनीकी प्रबंधक के अधिकांश पद रिक्त हैं। कर्मचारी संगठन कई बार रिक्त पदों को भरने की मांग कर चुके हैं, लेकिन अभी प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। इधर, काम के दबाव में कर्मचारी तनावग्रस्त हो गए हैं। बीते तीन मार्च को बरवाला के सहायक कृषि विकास अधिकारी ने तो तंग आकर आत्महत्या जैसा कठोर कदम उठा लिया। इसके बाद भी कृषि विभाग के वरिष्ठ अफसरों ने इस ओर ध्यान देना मुनासिब नहीं समझा।
जिले में कुल एक लाख 62 हजार किसान हैं, जो कि 3,40,196 हेक्टेयर क्षेत्रफल में गेहूं, कपास, धान, बाजरा के अलावा फल, फूल व सब्जी की खेती करते हैं। इन किसानों को कृषि विभाग से संबंधित नई योजनाओं की जानकारी देने व खेती से संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए सहायक कृषि विकास अधिकारी का पद सृजित है। फसलों का सत्यापन, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के आवेदनों का सत्यापन समेत तमाम अन्य कार्य भी सहायक कृषि विकास अधिकारियों के जिम्मे है। इसके अलावा आत्मा (एग्रीकल्चर टेक्नालॉजी मैनेजमेंट एजेंसी) परियोजना के तहत एग्रीकल्चर टेक्नालॉजी मैनेजर व ब्लॉक टेक्नालॉजी मैनेजर के पद भी हैं। हालांकि इन पदों में से अधिकांश रिक्त पड़े हैं। एक एडीओ के क्षेत्र में आठ-दस गांव हैं, इसके बाद अतिरिक्त प्रभार के 10-20 गांव और दे दिए गए। सभी जगह के काम एक ही वक्त में पूरा करने का दबाव अलग से है। लिहाजा अधिकांश कर्मचारी तनाव में नौकरी कर रहे हैं।
एडीओ रघुबीर ने सुसाइड नोट में भी लिखी थी ये वजह
बीते तीन मार्च को बरवाला के एडीओ रघुबीर ने हिसार शहर स्थित अपने घर में आत्महत्या कर ली थी। घटनास्थल पर एक सुसाइड नोट मिला, जिसमें आत्महत्या की वजह काम की अधिकता व समय पर कार्य पूरा करने के लिए अधिकारियों का दबाव बताया गया था। इस मामले में दो अधिकारियों के खिलाफ केस भी दर्ज हुआ है। इसके बाद से कर्मचारी और अधिक तनाव में नौकरी कर रहे हैं।
आंकड़े दे रहे गवाही, किस कदर लाचार हैं कर्मचारी
कृषि विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार जिले में एडीओ (सामान्य) के 59 पदों के सापेक्ष केवल 21 कर्मचारी तैनात हैं। रिक्त 38 कर्मचारियों का काम भी इन्हीं के जिम्मे है। इस कारण हर कर्मचारी को कम से कम एक अतिरिक्त क्षेत्र आवंटित है। एडीओ (प्लांट प्रोटेक्शन) के 9 में से 5 पद रिक्त हैं। यहां भी सभी पर अतिरिक्त पदभार है। सबसे खराब हालत तो आत्मा परियोजना की है। इसमें ब्लॉक तकनीकी प्रबंधक के नौ पदों के सापेक्ष केवल एक तैनाती है। इसके अलावा एग्रीकल्चर तकनीकी प्रबंधक के 27 पदों के सापेक्ष केवल 7 पर तैनाती है। यहां तो एक के जिम्मे तीन लोगों का काम है।
संगठन लंबे समय से कर रहा है मांग
एडीओ एसोसिएशन के प्रदेश उपाध्यक्ष ओपी दहिया का कहना है कि संगठन ने कई बार मांग की तो पिछले साल सरकार ने एडीओ की 600 पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू की थी, लेकिन परीक्षा में प्रश्नपत्र इतना कठिन बनाया गया कि आवेदक उत्तीर्ण ही नहीं हो पाए। बाद में सरकार की तरफ से मेरिट कम करके रिक्त पदों पर भर्ती की बात कही गई, लेकिन प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। संगठन लगातार इस बात की मांग कर रहा है कि सभी रिक्त पद तत्काल भरे जाएं और जब तक पद रिक्त हैं, कर्मचारियों पर अतिरिक्त दबाव न बनाया जाए।
कोट
कर्मचारियों की कमी के कारण अतिरिक्त दबाव की बात सही है, लेकिन काम भी पूरा करना है। सरकार से रिक्त पदों को भरने के लिए मांग पत्र पहले भी भेजा जा चुका है। कर्मचारी संगठन की मांग को पुन: शासन तक पहुंचाया जाएगा। कर्मचारी तनाव मुक्त होकर कार्य करें, इसके लिए बातचीत कर समस्या का समाधान किया जा रहा है।
आत्माराम गोदारा, प्रभारी उप निदेशक कृषि हिसार