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Hisar News: शहर में चल रहे 500 से अधिक पीजी, नगर निगम में एक भी पंजीकृत नहीं

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हिसार। शहर में नियमों को ताक पर रखकर 500 से अधिक पीजी (पेइंग गेस्ट) चल रहे हैं। इनमें से एक भी पीजी का नगर निगम कार्यालय में रजिस्ट्रेशन नहीं है। कॉमर्शियल नक्शे, 250 वर्ग गज जगह से लेकर फायर एनओसी लेने तक की शर्तें नगर निगम प्रशासन ने पीजी संचालकों के लिए लगाई हुई हैं। मगर इनमें से एक भी शर्त को पीजी संचालक पूरा नहीं कर रहे हैं। हालांकि निगम की तरफ से अवैध पीजी संचालकों को नोटिस तो थमाए गए, लेकिन आज तक एक भी पीजी को सील नहीं किया गया। वहीं पूर्व मेयर गौतम सरदाना ने भी अवैध पीजी पर कार्रवाई को लेकर निगमायुक्त को पत्र लिखा है।
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शहर में सबसे अधिक पीजी कोचिंग संस्थानों के आसपास बनीं कॉलोनियों में चल रहे हैं। ऋषि नगर, जवाहर नगर, डिफेंस कॉलोनी, रामपुरा मोहल्ला, बैंक कॉलोनी, कृष्णा नगर, मॉडल टाउन, अर्बन एस्टेट टू, आदि एरिया में धड़ल्ले से पीजी चल रहे हैं, जो निगम प्रशासन की तरफ से तय नियमों को पूरा नहीं करते हैं। कई पीजी तो ऐसे संकरी गलियों में बने हुए हैं, जहां आग लगने की स्थिति में फायर ब्रिगेड की गाड़ी तक नहीं जा सकती है।
जवाहर नगर के एक पीजी में देर रात हुआ था हंगामा
बुधवार रात को जवाहर नगर की गली नंबर 6 में बने एक पीजी में लड़कियां लाने को लेकर मोहल्ले के लोगों ने खूब हंगामा किया। हंगामे की सूचना पर पुलिस भी मौके पर पहुंची थी। इस दौरान लोगों ने आरोप लगाया कि पीजी में अनैतिक गतिविधियां होती हैं। लोगों ने पुलिस वालों से पीजी को खाली व बंद करवाने की मांग की। हालांकि पुलिस वालों का कहना था कि पीजी को बंद करवाना उनका काम नहीं है। बता दें कि अवैध रूप से पीजी चलाने वालों के खिलाफ नगर निगम प्रशासन नगर निगम अधिनियम की धारा 392 (बी) के तहत कार्रवाई कर सकता है। इसमें पहले नोटिस दिया जाता है। फिर बिल्डिंग को सील किया जा सकता है। सील तोड़ने पर सीधे एफआईआर दर्ज होगी।
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पीजी के लिए मुख्य नियम
- पीजी का नगर निगम में पंजीकरण होना चाहिए।

- कॉमर्शियल नक्शा पास होना चाहिए।

- 250 वर्ग गज से कम जगह में पीजी नहीं बन सकता।

- पीजी जहां बना है, वहां पीजी संचालक अपनी फैमिली के साथ रहना चाहिए।

- पीजी में रहने वाले एक व्यक्ति को कम से कम 50 वर्ग फुट जगह मिलनी चाहिए।

- पीजी में सीसीटीवी व फायर एनओसी होनी जरूरी।

- पीजी में रहने वाले प्रत्येक गेस्ट की पुलिस वेरिफिकेशन होनी चाहिए।

- पीजी में नया सदस्य रहने आएगा तो उसकी तीन दिन में जानकारी पुलिस को देनी होती है।

- पीजी संचालक को आसपास की आरडब्ल्यूए और वार्ड के पार्षद की सहमति लेनी होगी।

- पीजी में रहने वालों की पूरी डिटेल के साथ रजिस्टर लगाना जरूरी है।

जवाहर नगर में जिस पीजी में हंगामा हुआ, उसकी जांच की जानी चाहिए। अगर वह पीजी अवैध है तो उसे तुरंत सील करना चाहिए। अगर वह वैध है तो भी पीजी पर कार्रवाई जाए, क्योंकि उस पीजी में अनैतिक गतिविधियां चलने का आरोप है। शहर में जितने भी पीजी हैं, उन सभी की जांच होनी चाहिए। शहर में करीब 500 पीजी होंगे। - गौतम सरदाना, पूर्व मेयर
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