जिला निवासी 16 साल वर्षीय नाबालिग द्वारा शादी के लिए अपनी 21 वर्षीय बहन का आधार कार्ड और नाम का प्रयोग किया गया। मामले का खुलासा तब हुआ जब शादीशुदा जोड़ा प्रोटेक्शन मांगने पहुंचा। नाबालिग ने धोखाधड़ी से एक संस्था में शादी की। इसके बाद सेशन जज से सुरक्षा मांगी। शादी करने वाले जोड़े ने सेशन जज से फर्जी कागजात के सहारे प्रोटक्शन भी ले ली। मामले में सेशन जज के रीडर मुकेश की शिकायत पर लड़की और लड़के पर धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया है। इस जोड़े ने तीन सितंबर को एक संस्था में शादी की। वहां नाबालिग लड़की ने अपनी बड़ी बहन का आधार कार्ड दिया। अपनी जगह अपनी बहन का आधार कार्ड देकर उसकी के नाम का सहारा लिया और उसी के हस्ताक्षर भी किए। इसके बाद जोड़े ने 10 सितंबर को सेशन जज से सुरक्षा मांगी। सुरक्षा देने से पहले लड़की, लड़का व उनके परिवार वालों के भी बयान लिए गए। इस दौरान लड़की के पिता के बयान लिए तो पिता ने कहा कि उसकी छोटी बेटी ने अपनी बड़ी बहन का आधार कार्ड शादी के लिए पेश किया है और उसके नाम से ही शादी की है। जबकि असलियत में वह 16 साल की है जो आधार कार्ड उसने प्रयोग किया है वह उसकी बड़ी बेटी का है। लड़की से पूछा गया तो उसने कहा कि उसके पति को भी उसकी उम्र के बारे में नहीं पता। लड़की ने कहा कि उसने शादी करने के लिए उसकी बड़ी बहन का आधार कार्ड प्रयोग किया। मामले में सेशन जज अरुण कुमार सिंघल की जजमेंट के आधार पर केस दर्ज किया गया है। जजमेंट में लिखा कि लड़का और लड़की पर केस दर्ज किया जाए। लड़का-लड़की ने धोखाधड़ी करके शादी की है। लड़की की वास्वतिक 16 साल की है। अपनी बहन का ही आधार कार्ड दिखा दिया। शादी भी कर ली। एक संस्था ने दोनों की शादी करवाकर मैरिज सर्टिफिकेट भी दे दिया।