सिरसा। जिले में लंपी पॉक्स का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है और अभी तक पशुपालन विभाग के पास वैक्सीन भी नहीं पहुंची है। इसके चलते गोशाला तथा पशुपालकों में इस संक्रमण के फैलने का भय बना हुआ है। अब तक इस बीमारी से जिले में 3 हजार 444 पशु संक्रमित हो चुके हैं। इनमें से 61 पशुओं की मौत हो चुकी है। पशुपालन विभाग क अधिकारियों का कहना है कि अवकाश के चलते वैक्सीन पहुंचने में विलंब हुआ है, लेकिन बुधवार तक वैक्सीन आने की संभावना है।
विभाग की ओर से अपने स्तर पर विभिन्न गोशालाओं व गांव में अभियान चलाकर पशुओं का उपचार किया जा रहा है। जहां पशुओं में लंपी वायरस के संक्रमण पाए जा रहे हैं वहां पशुओं की स्थिति के अनुसार दवाएं देकर उन्हें स्वस्थ किया जा रहा है। इसी के चलते 3444 पशुओं में से 2713 पूरी तरह से स्वस्थ हो चुके हैं।
जहां पशु संक्रमित नहीं, वहां वैक्सीन होगी फायदेमंद
पशुपालन विभाग के उप निदेशक डॉ. विद्यासागर बांसल ने बताया कि वैक्सीन केवल उसी क्षेत्र में फायदेमंद होगी, जहां पर लंपी वायरस का संक्रमण नहीं फैला हुआ है। वैक्सीन लगने के बाद पशुओं में इसकी प्रक्रिया का समय 20 दिन से लेकर एक माह तक होता है। वैक्सीन लगने के बाद भी पशु इससे संक्रमित हो सकता है। बुधवार तक हमारे पास वैक्सीन पहुंचने की उम्मीद है। टीम जांच व उपचार में लगी हुई है। इसके फैलने पर तभी अंकुश लगेगा जब पशुुओं के नीचे अच्छे तरीके से साफ सफाई रहेगी।
श्री गोशाला में नहीं एक भी पशु संक्रमित
वैक्सीन व साफ सफाई का विशेष प्रबंध के चलते लंपी वायरस का संक्रमण कम फैल रहा है। शहर की श्री गोशाला में यह देखने में सामने आया है कि यहां अब तक एक भी पशु इस वायरस से ग्रस्त नहीं है। गोशाला में निरंतर सफाई की जा रही है और पशुओं के स्थान भी समय पर समय पर बदले जा रहे हैं। इसके अलावा यहां तमाम पशुओं के वैक्सीन दी जा चुकी है।
श्री श्याम गोरक्षा दल ट्रस्ट में करीब 8 पशु संक्रमित, एक गंभीर
श्री श्याम गोरक्षा मेमोरियल ट्रस्ट में 334 पशुओं का पालन किया जा रहा है, जो पूरी तरह स्वस्थ हैं, लेकिन यहां बाहर से लाए गए करीब 8 पशुओं में लंपी का संक्रमण होने के चलते बीमार हैं और उनका उपचार चल रहा है। इनमें से एक गाय की स्थिति काफी गंभीर है। गाय के चारों पैरों में काफी जख्म बन चुुके हैं। ट्रस्ट की ओर से तमाम पशुओं के लिए निजी तौर पर वैक्सीन लगवाई जा चुकी है। लंपी से ग्रस्त इन पशुओं से अन्य पशुओं में संक्रमण फैल भी सकता है, इसलिए इन्हें ग्रीन बेल्ट में काफी दूरी पर रखा गया है।