हिसार। सरकार ने देशभर में एक जुलाई से नए कानून लागू कर दिए हैं। अब भारतीय दंड संहिता और सीआरपीसी की जगह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता लागू की गई है। कानून में बदलाव पर शहर के वकीलों ने अपनी राय रखी। वकीलों के मुताबिक सरकार के बिना सोचे समझे जनता पर नए कानून थोपे हैं। नए कानूनों में अभी तक कुछ स्पष्ट नहीं कि क्या करना है। सरकार ने बस पुरानी धाराओं के नाम बदले हैं और पुलिस की शक्ति को बढ़ाया है।
अंग्रेजों से भी खतरनाक कानून
सरकार ने जो नए कानून लागू किए हैं, वह अंग्रेजों के कानूनों से भी खतरनाक है। पहले पुलिस आरोपियों का 15 दिन तक का रिमांड ले सकती थी, लेकिन नए कानून में पुलिस 90 दिन तक आरोपी को रिमांड पर ले सकती है। आरोपी का पुलिस चालान होने तक उसकी जमानत याचिका नहीं लगाई जा सकती। पहले पुलिस धरना-प्रदर्शन करने वालों को पकड़ती थी तो एफआईआर दर्ज करती थी, नए कानून में ऐसा कुछ नहीं है, पुलिस बिना एफआईआर के भी उन्हें अपनी हिसार में रख सकती है। - एडवोकेट लाल बहादुर खोवाल
नए कानूनों में कुछ स्पष्ट नहीं
नए कानूनों में अभी तक कुछ भी स्पष्ट नहीं है। नए कानून अभी तक ये भी नहीं पता चला कि जो पहले केस दर्ज हैं उनका कोर्ट में ट्रायल ने नए कानूनों में चलेगा या पुराने कानून में। अगर कोई अदालत में इस्तगासा दायर करता है तो वह किसी धारा में चलेगा, इसका अभी तक पता नहीं चला। पुराने कानून में पुलिस आरोपी को रिमांड पर लेती थी तो उसमें पुलिस लिखा होता था, लेकिन अब पुलिस आरोपी को रिमांड पर लेगी तो उसमें पुलिस की जगह डिटेक्शन अंकित है। ऐसे में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। - एडवोकेट मनमोहन राय।
पुलिस कर सकती है शक्ति का दुरुपयोग
नए कानूनों में सरकार ने पुरानी धाराओं के नाम बदले हैं। पहले हत्या करने पर धारा 302 लगती थी, अब धारा 103 लगती है। सरकार ने इसमें कुछ नहीं किया। मेजर एक्ट में जो बदलाव किए हैं वो बिना सोचे समझे किए हैं। नए कानूनों में पुलिस की शक्ति को बढ़ाया गया है। पुलिस अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कर सकती है। नए कानूनों के बारे में अभी आम जनता को नहीं पता कि क्या करना है। - एडवोकेट राजेश गोयल