हिसार। महिला संरक्षण अधिकारी बबिता चौधरी।
हिसार। पति-पत्नी सात फेरे लेकर साथ जीने-मरने की कसम करते हैं। माता-पिता बड़े अरमान के साथ बेटी को डोली में बैठाकर अपने घर से विदा किया था, लेकिन समय के साथ अब सोशल मीडिया का घंटों इस्तेमाल पति-पत्नी के रिश्तों में दरार की वजह बनने लगा है। सोशल मीडिया के चक्कर में जहां महिलाएं खाना बनाना भूल रही हैं, वहीं पुरुष मोबाइल के चक्कर में अपने बच्चों व पत्नी को वक्त नहीं दे पा रहे हैं। ऐसे में आपसी झगड़े बढ़ने जा रहे हैं। कुछ मामले तो थाने तक पहुंच रहे हैं। वहां समाधान नहीं होने से जिला महिला एवं बाल विकास विभाग के पास समझौते के मामले बढ़ते जा रहे हैं। कई मामलों में तो तलाक की नौबत आ चुकी है। जिले में जनवरी से जून तक 362 घरेलू हिंसा के मामले सामने आ चुके हैं।
महिला संरक्षण अधिकारी बबीता चौधरी ने बताया कि सोशल मीडिया से हमें जितना फायदा हो रहा है, उतना ही नुकसान झेलना पड़ रहा है। इंस्टाग्राम जो एक सोशल मीडिया प्लेटफार्म है उस पर रील बनाने की होड़ लगी हुई है। ऐसे में कई परिवार टूटने के कगार तक पहुंच चुके हैं। उन्होंने कहा कि विभाग के पास आने वाले घरेलू हिंसा के मामलों में दोनों पक्षों को बुलाकर समझाया जाता है। उनकी पूरी कोशिश होती है कि सुलह हो जाए ताकि कोई घर, कोई रिश्ता टूटे ना। लेकिन कुछ गंभीर केस होते हैं जो काउंसलिंग के बाद भी एक-दूसरे के साथ नहीं रहना चाहते।
केस-1 : काम पर भूखा जाना पड़ता है
दो दिन पहले ऐसा ही एक केस बरवाला से आया था। पति की शिकायत थी कि उनकी पत्नी इंस्टाग्राम पर रील बनाने में इतनी व्यस्त रहती है कि बच्चों के लिए समय पर खाना तक नहीं बनाती। मैं मजदूरी करता हूं और जब काम पर जाने का समय होता है तो उस समय भी वह रील बनाने में लगी रहती है। साथ में मुझ पर भी रील बनाने का दबाव डालती है।
केस-2 : घरेलू कलह के चलते पत्नी के काट दिए बाल
उन्होंने बताया कि पहली बार ऐसा कुछ देखने को मिला है कि मिलगेट एरिया की रहने वाली युवती की शादी बरवाला के रहने वाले एक युवक से हुई थी। उनके तीन बच्चे है। पति शराब पीने आदी है और ऐसे में दोनों के बीच घरेलू झगड़े होते रहे। पत्नी कहीं बाहर न जा पाए और किसी को पिटाई की शिकायत न दे सके। ऐसे में दो माह पहले पति ने अपनी पत्नी के सिर के सारे बाल काट दिए। शर्म के मारे वह दो माह तक मायके में रही। अब वह शिकायत लेकर आई। दोनों पक्षों को बुलाया और समझौता करवा दिया।
घरेलू हिंसा के जनवरी से जून तक के मामले
जनवरी 66
फरवरी 50
मार्च 73
अप्रैल 70
मई 57
जून 46