इंडियन नेशनल लोकदल कार्यकर्ताओं से पूछकर आदमपुर उपचुनाव के लिए प्रत्याशी घोषित करेगा। इनेलो नेता अभय सिंह चौटाला ने कहा कि आदमपुर उपचुनाव के लिए अगले 3 दिन तक इनेलो की पांच सदस्यीय कमेटी में आदमपुर हलके के सभी गांव में दौरा करेगी और पार्टी प्रत्याशी के लिए कार्यकर्ताओं से नाम मांगेगी। उसके बाद सुझाए गए चार नामों को पार्टी सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला के सामने रखा जाएगा। उन नामों में से इनेलो प्रत्याशी के लिए नाम फाइनल कर दिया जाएगा।
अभय सिंह चौटाला गुरुवार को हिसार में पार्टी की राज्य कार्यकारिणी की बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि आदमपुर उपचुनाव के लिए कांग्रेस के पास स्थानीय उम्मीदवार तक नहीं है। कभी कहते हैं, प्रोफेसर संपत सिंह लड़ेंगे तो कभी जयप्रकाश लड़ेंगे लेकिन दोनों बाहर के हैं। कांग्रेस के पास हलके से संबंध रखने वाले उम्मीदवार तक नहीं है।
उन्होंने कुलदीप बिश्नोई पर निशाना साधते हुए कहा कि आदमपुर उपचुनाव को थोपा गया है। कुलदीप बिश्नोई ने बेटे को राजनीति में स्थापित करने के लिए इस्तीफा दिया है और खुद को ईडी और आयकर की कार्रवाई से बचाने के लिए ऐसा किया है। उन्होंने आदमपुर के मतदाताओं से अपील की कि वह सोच समझकर वोट डालें। स्वार्थ की राजनीति करने वालों को जनता नकारेगी। यह लोकसभा चुनाव में भी साबित हो चुका है। लोकसभा चुनाव में भजनलाल का गढ़ कहलाए जाने वाले आदमपुर में भजन लाल के बूथ पर भव्य को हार का मुंह देखना पड़ा था।
आदमपुर उपचुनाव नहीं लड़ेगी बसपा
बहुजन समाज पार्टी आदमपुर उपचुनाव नहीं लड़ेगी। नलवा विधानसभा से विधायक प्रत्याशी रहे एडवोकेट बजरंग इन्दल ने कहा कि यह बसपा की स्टेट्रेजी है। न ही बसपा किसी पार्टी या व्यक्ति विशेष के पक्ष में मतदान करने के लिए अपने कार्यकर्ताओं को कोई इशारा देगी। बसपा के कार्यकर्ता स्वतंत्र है। वे अपने विवेक से इस उपचुनाव में वोट करेंगे। बसपा की तरफ से किसी के पक्ष में वोट शिफ्टिंग नहीं होगा।
एडवोकेट इन्दल ने कहा कि चुनाव को लेकर वैसे तो अंतिम फैसला पार्टी सुप्रीमो बहन मायावती का ही होता है लेकिन बसपा ने हरियाणा में कभी उपचुनाव नहीं लड़ा है। दूसरा कारण यह है कि आदमपुर उपचुनाव को लेकर आचार संहिता लागू हो चुकी है। तीन नवंबर को मतदान होगा। एक महीने से कम का समय बचा है फिर भी पार्टी सुप्रीमो बहन मायावती की तरफ से इस उपचुनाव को लेकर कोई ट्वीट या दिशानिर्देश कार्यकर्ताओं के पास नहीं आया है। यदि चुनाव लड़ने की प्लानिंग करती तो आचार संहिता लागू होने से पहले ही पार्टी नेताओं के आदमपुर हलके में दौरे शुरू हो जाते।