हिसार। देश की आजादी के 10 साल बाद वर्ष 1957 में संयुक्त पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री ने हिसार के नागरिक अस्पताल का उद्घाटन किया। उस समय 100 बेड का यह अस्पताल करीब 5 लाख की लागत से तैयार हुआ था। वर्ष 1957 में संयुक्त पंजाब के हिसार जिले की आबादी करीब 15 लाख थी। वर्ष 2011 की गणना के अनुसार जिले की आबादी करीब 17 लाख रही। वहीं, आज 2022 में जनसंख्या करीब 22 लाख पार हो चुकी है, लेकिन स्वास्थ्य सुविधाएं न के बराबर बढ़ी हैं
जनसंख्या बढ़ने के साथ-साथ अस्पताल का दो बार विस्तार हुआ और बेडों की संख्या बढ़कर 200 पहुंच गई। लेकिन, जिस तरह जनसंख्या बढ़ी उसके हिसाब से सरकारी अस्पताल का विस्तार नहीं हुआ। करीब 65 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद नागरिक अस्पताल में बेड की संख्या 100 से 200 ही पहुंच सकी। जबकि जिले को करीब 500 बेड के सरकारी अस्पताल की दरकार है।
प्राइवेट रूम के देेने होते थे रुपये
जानकारी के अनुसार जब सरकारी अस्पताल का उद्घाटन हुआ उस समय अस्पताल परिसर के अंदर प्राइवेट रूम भी थे। प्राइवेट रूम में भर्ती होने के लिए मरीजों को सिफारिश लगानी पड़ती थी। मरीजों को प्राइवेट रूम के लिए रुपये देने पड़ते थे। जैसे-जैसे समय बदलता गया अस्पताल से प्राइवेट वार्ड खत्म हो गया। जनसंख्या बढ़ने के साथ अस्पताल का विस्तार भी हुआ। वर्ष 1974 के बाद दो ब्लॉक और बनाए गए और बेडों की संख्या बढ़कर 200 की गई।
चिकित्सकों का टोटा
वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार जिले की जनसंख्या 17 लाख 43 हजार थी। 2021 में जनगणना होनी थी लेकिन कोरोना काल के चलते नहीं हो पाई। पिछले सालों में सरकारी अस्पताल में मरीजों के लिए कई प्रकार की सुविधाए आई, लेकिन बिल्डिंग का विस्तार नहीं हो पाया। जनसंख्या के हिसाब से जिले के लोगों को 500 बेड के अस्पताल की जरूरत है। फिलहाल स्थिति यह है कि 200 बेड के अस्पताल में भी चिकित्सकों का टोटा है। 55 मेडिकल ऑफिसर के स्वीकृत पद हैं उन पर 37 चिकित्सक ही नियुक्त हैं।
पुरातत्व विभाग बना अड़चन
नागरिक अस्पताल के पास ही गुजरी महल की इमारत है। जब भी नागरिक अस्पताल में बिल्डिंग का निर्माण कार्य शुरू किया जाता है तो पुरातत्व विभाग द्वारा उसे रुकवा दिया जाता है। जिस कारण अस्पताल को शिफ्ट करने के लिए कई सालों से जमीन तलाशी जा रही है।
नागरिक अस्पताल को शिफ्ट करने के लिए प्रपोजल बनाकर उच्च अधिकारियों के पास भेजा है। जनसंख्या के हिसाब से बड़े सरकारी अस्पताल की जरूरत है। चिकित्सकों की कमी को दूर करने के लिए विभाग को लिखा हुआ है। - डॉ. रत्ना भारती, सीएमओ
विद्यार्थियों की बढ़ती रही संख्या, कॉलेज भवन हो गए संकरे
सरकार की ओर से 31 जुलाई तक जिले में जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा मनाया जा रहा है। करीब एक दशक पहले कॉलेेजों में दाखिले के लिए विद्यार्थियों में मारीमारी नहीं होती थी। साल बीतने के साथ-साथ के जनसंख्या बढ़ती गई। कुछ साल बाद सीटें तो सीमित रही लेकिन कॉलेजों में आवेदनों की संख्या बढ़ती रही। आज विद्यार्थियों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन कॉलेज भवन संकरे हो गए हैं। हर साल हजारों विद्यार्थी दाखिले से वंचित रह रहे हैं।
करीब एक दशक पहले गवर्नमेंट पीजी कॉलेज हिसार में 5 से 7 हजार आवदेन आते थे, अब आवेदकों की संख्या करीब 21 हजार पार पहुंच चुकी हे। राजकीय पीजी कॉलेज की यूजी व पीजी कॉर्स के प्रथम वर्ष में दाखिला लेने के लिए हर साल करीब 20 हजार विद्यार्थियों के आवदेन आते हैं। यूजी व पीजी कोर्स में सिर्फ दो हजार सीटें हैं। सेशन 2021-22 में 23878 आवेदन जमा हुए थे, जिनमें से सिर्फ दो हजार आवेदकों को ही दाखिला मिल पाया था। बाकी 21878 विद्यार्थियों को निराशा हाथ लगी थी। वहीं, डीएन कॉलेज, सीआरएम जाट कॉलेज, हांसी गवर्नमेंट कॉलेज में सहित जिले के अन्य कॉलेजों में दाखिले के लिए मारामारी मची है।
शिक्षकों का कहना है कि करीब 2 दशक पहले पहले इन कॉलेजों में बगैर लाइन में लगे दाखिला मिलता था। राजकीय बहुतकनीकी संस्थान की बिल्डिंग भी छोटी पड़ गई है, ऐसे में जिले में एक ओर राजकीय बहुतकनीकी शिक्षण संस्थान संस्थान की दरकार है। बिल्डिंग की कैपेसिटी करीब 2 हजार विद्यार्थियों की है, जबकि कॉलेज में तीन हजार से ज्यादा विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं। पांच कोर्सों की 90 सीटों के साथ वर्ष 1992 में शुरू हुआ राजकीय बहुतकनीकी संस्थान में आज 13 कोर्स में करीब 840 सीटें हैं।