हिसार। नगर निगम की जमीन पर गोवंश की चर्बी से घी बनाने के बड़े खुलासे ने पुलिस व खुफिया विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर में कई बार मिलावटी घी की फैक्टरी पकड़ी जा चुकी हैं। पहली बार गोवंश की चर्बी से घी बनाने के मामले का खुलासा हुआ है।
पुलिस को दी शिकायत में खजान हिंदू ने बताया कि ढंढूर के पास गोमांस का अवैध धंधा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। वीरवार सुबह हड्डा रोड़ी में गया तो वहां पर 6-7 व्यक्ति गोवंश को काट रहे थे। जब हमने रोकने का प्रयास किया तो गोकशी करने वालों ने हथियार लहरा कर जान से मारने की धमकी दी। पुलिस बल के साथ मौके का मुआयना किया तो वहां बड़ी संख्या में गायों के मारने जाने और गोमांस व चमड़ी आदि निकालने के सुबूत मिले।
नगर निगम ने हड्डा रोड़ी को तीन साल के लिए ठेके पर दिया हुआ है। इस ठेके की एवज में वह निगम को एक साल के 5 लाख रुपये का भुगतान कर रहा है। हड्डा रोड़ी करीब 3 एकड़ की जगह में है। ठेके की शर्त के अनुसार ठेकेदार को सूचना मिलने के 12 घंटे में मृत पशु को उठाना होता है। साथ ही उसके इस्तेमाल होने वाले अंगों को अलग करने के बाद बाकी बचे अवशेषों को जमीन में दबाना होता है।
लुवास के पशु वैज्ञानिकों ने बताया कि गाय की चर्बी को बीफ टैलो कहा जाता है। खाना न मिलने पर पशु को इस चर्बी से ही ऊर्जा मिलती है। इसमें ट्राइ ग्लाइसराइड्स नाम का एक गुण होता है, जिस कारण यह 30 से 40 डिग्री सेल्सियस पर पिघल जाती है। वहीं घी 25 से 40 डिग्री सेल्सियस पर पिघल जाता है। इस कारण गाय की चर्बी आसानी से घी में मिक्स हो जाती है। इसे घी में 30 से 40 प्रतिशत तक मिलाया जा सकता है। इसका पता लगाना भी काफी मुश्किल है। इसके लिए करनाल के एनडीआरई में ही एक लैब है। मगर यह सेहत के लिए काफी नुकसानदायक है, क्योंकि यह आंत व नसों में जम जाती है। हालांकि विदेशों में लोग इसे तेल व घी की जगह इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा कॉस्टमेटिक इंडस्ट्री में इसे साबुन, शैंप में इमलसिफाइंग एजेंट के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। यहां अंडे की जगह इसका प्रयोग किया जाता है। गाय की चर्बी चिकनाहट को बढ़ा देती है।
मृत पशुओं को उठाने का काम हमने ठेके पर दिया हुआ है। चर्बी से घी बनाने का मामला संज्ञान में नहीं है। मामले की जांच करवाई जाएगी। अगर ठेकेदार ने ठेके के नियम व शर्तों के विपरीत कोई कार्य किया है तो उसके खिलाफ एक्ट के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। - प्रदीप दहिया, नगर निगम आयुक्त
इस बारे में अधिकारियों से बातचीत कर उनसे जवाब मांगा जाएगा और दोषी कर्मचारी व अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई के लिए लिखा जाएगा। - गौतम सरदाना, मेयर
नगर निगम प्रशासन ने जो मुर्दा पशु और हड्डा रोड़ी का टेंडर किया है, उसमें गाय के शव को लेकर क्या नियम शर्तें हैं, वो स्पष्ट की जाए। इस घटना की जांच को लेकर एसआईटी गठित की जानी चाहिए। हड्डा रोड़ी का काम तुरंत प्रभाव से बंद हो और मुर्दा पशु उठाने के बाद उसके शव को दबाने की व्यवस्था की जाए। - अमित ग्रोवर, पार्षद, वार्ड 14
हार्ट और लीवर पर डालता है असर
नकली घी का लगातार सेवन करना खतरनाक है। नकली घी खाने से यह धमनियों में जम जाता है। जिस कारण हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा लीवर को फेल कर देता है। पेट की कई बीमारियां इस से होती है। अक्सर पेट में दर्द रहता है। लगातार सेवन से व्यक्ति की मौत भी हो सकती है। - डॉ. ज्ञानेंद्र, फिजिशियन, नागरिक अस्पताल
चर्बी से नहीं बन सकता घी
घी को देखने से नहीं बता सकते कि ये घी नकली है या असली। इसका पता लैब में जांच के बाद ही पता चल पाएगा। पशुओं की चर्बी को गर्म कर उसमें तेल डालने से साबुन बन सकता है, लेकिन चर्बी से घी नहीं बन सकता। बाकी जांच के बाद ही पता चल पाएगा। - डॉ. भवर सिंह, एफएसओ, नागरिक अस्पताल, हिसार
हड्डा रोड़ी में मृत मिले पशुओं का पोस्टमार्टम करवाया गया है। इसके अलावा वहां पर जो मटिरियल मिला है उसके पशु पालन विभाग ने सैंपल लिए हैं। अभी रपट दर्ज की है। जांच के बाद आगे की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। - एएसआई दिनेश कुमार, जांच अधिकारी, सदर थाना, हिसार
ढंढूर के पास गोमांस का अवैध धंधा करने वालों के खिलाफ कार्यवाही की जाए। वीरवार सुबह हड्डा रोड़ी में गया तो वहां पर 6-7 व्यक्ति गोवंश को काट रहे थे। जब हमने रोकने का प्रयास किया तो गोकशी करने वालों ने हथियार लहरा कर जान से मारने की धमकी दी। पुलिस बल के साथ मौके का मुआयना किया तो वहां बड़ी संख्या में गायों के मारने जाने और गोमांस व चमड़ी आदि निकालने के सुबूत मिले। - खजान हिंदू, शिकायतकर्ता