फुटबाल खिलाड़ी हिमांशु जांगड़ा।
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हिसार। छह साल पहले सेक्टर-15 निवासी हिमांशु जांगड़ा किक का दम दिखाने मैदान में उतरा तो माता-पिता ने खेलने से साफ मना कर दिया। मगर उसने हौसला नहीं तोड़ा। तीन महीने तक माता-पिता से छिपकर दोस्तों के साथ पार्क में प्रेक्टिस की। उसके बाद जाट कॉलेज में खेलना शुरू कर दिया।
कुछ दिन बाद जब पिता सुरेश को पता चला कि बेटा जाट कॉलेज में प्रेक्टिस करने जाता है और उसकी फुटबाल में काफी रुचि है तो उन्होंने बेटे को खेल किट दिलाई। उसके बाद फिर बेटे हिमांशु ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। आज हिमांशु भारतीय टीम में अपनी किक का दम दिखा रहा है। फिलहाल हिमांशु सैफ अंडर-20 फुटबॉल टूर्नामेंट में भारतीय टीम में खेल रहा है। शुक्रवार को श्रीलंका के साथ हुए मुकाबले में भारत को जीत दिलाने में हिमांशु का विशेष योगदान रहा। भारत ने श्रीलंका को 4-0 से हराया था। उसमें पहला गोल हिमांशु ने ही किया था। फिलहला हिमांशु मोहाली के मिनर्वा क्लब में प्रशिक्षण ले रहा है। टूर्नामेंट का आयोजन भुवनेश्वर में स्थित कलिंगा स्टेडियम किया जा रहा है। पिता सुरेश ने बताया कि अब रविवार को नेपाल के साथ मैच होगा। वहीं पिता सुरेश का खुद का व्यवसाय है। माता संतोष गृहिणी है।
पिता बोले थे- बेटा आप भारतीय टीम में नहीं जा सकते
हिमांशु के पिता सुरेश जांगड़ा ने बताया कि जब बेटे ने फुटबॉल खेलना शुरू किया तो मैंने बेटे को कहा कि भारतीय टीम में जाने के लिए बहुत कुछ करना पड़ता है। आप भारतीय टीम में नहीं जा सकते हो। उस दौरान बेटे हिमांशु ने कहा कि पापा एक दिन मैं आपके सामने भारत की टीम में खेलकर दिखाऊंगा। आज जब बेटा भारतीय टीम में खेल रहा है तो उनको गर्व से अनुभूति हो रही है कि बेटे ने जो बोला वह कर दिखाया।
हिमांशु ने बॉक्सिंग खेलने से कर दिया था मना, बोला- खेलूंगा तो फुटबॉल ही
हिमांशु की शुरू से ही फुटबॉल खेल में रुचि थी। चचेरे भाई व बॉक्सर मंदीप जांगड़ा ने उसे बॉक्सिंग खेलने के लिए कहा था। वह हिमांशु को अपने साथ पटियाला भी ले गया। मगर वहां भी उसने फुटबॉल की ही प्रेक्टिस की। हिमांशु ने बॉक्सिंग खेलने से साफ मना कर दिया और बोला कि खेलूंगा तो फुटबाल ही। पिता सुरेश ने कहा कि आज उन्हें बेटे पर गर्व हो रहा है। आज बेटा भारतीय टीम में खेलकर प्रदेश व उनका नाम रोशन कर रहा है।