हर रोज पहुंच रहे चार-पांच मरीज
नागरिक अस्पताल में वेंटीलेटर होने के बावजूद भी इनका इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। अस्पताल के आपातकालीन कक्ष में भी वेंटीलेटर की कोई सुविधा नहीं है। जबकि हर रोज 4 से 5 गंभीर मरीज आते हैं जिनकों वेंटीलेटर की आवश्कता होती है, लेकिन अस्पताल में वेंटीलेटर की कोई सुविधा न होने से मरीजों को मेडिकल कॉलेज अग्रोहा या फिर पीजीआई रोहतक रेफर करना पड़ता है। इसके अलावा गंभीर मरीजों के परिजन वेंटीलेटर न होने कारण उन्हें निजी अस्पताल में ले जाते हैं।
पहले भी आए थे वेंटीलेटर
नागरिक अस्पताल में कोरोना के समय 39 वेंटीलेटर आए थे, लेकिन अभी इन वेंटीलेटरों की सुविधा मरीजों को नहीं मिली। एक कमरे में बंद ये धूल फांक रहे हैं। ऐसा पहली बार नहीं है करीब, सात साल पहले भी नागरिक अस्पताल में पांच वेंटीलेटर आए थे। उन वेंटीलेटरों को भी शुरू नहीं किया था। इसी कारण से उन वेंटीलेटरों को रोहतक के सरकारी अस्पताल में भेज दिया था।
24 घंटे होती है निगरानी
आईसीयू में भर्ती मरीजों की 24 घंटे निगरानी होती है। चिकित्सकों को ऑन कॉल रखा जाता है। आईसीयू के अंदर निपुण स्टाफ होता है जो मरीजों देखभाल करते हैं। अस्पताल परिसर के अंदर अभी तक कोई जगह न मिल पाने के कारण आईसीयू नहीं बना, लेकिन अब अस्पताल प्रशासन की तरफ से ओटी के सामने महिला वार्ड को आईसीयू के लिए चुना है और इसे बनाने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। इसके अलावा नर्सिंग ऑफिसर और चिकित्सकों को भी विशेष ट्रेंनिग दी जाएगी।
ओटी के सामने महिला वार्ड में आईसीयू बनने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। जल्द ही आईसीयू बनकर तैयार हो जाएगा। वेंटिलेटर की जगह न होने के कारण अभी तक शुरू नहीं हो पाए है।
- डॉ. रत्ना भारती, पीएमओ नागरिक अस्पताल।