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Hisar News: हिसार के वैज्ञानिक डॉ. नवीन कुमार और डॉ. अशोक बल्हारा को मिला अवॉर्ड ऑफ एक्सीलेंस

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नई दिल्ली में हिसार के वैज्ञानिकों समेत अन्य को सम्मानित करते केंद्रीय मंत्री। 
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हिसार। कोरोना संकट के दौरान जब लोग अपनी जान बचाने के लिए घरों में छिप रहे थे, अधिकांश लैब्स बंद थे, उसी दौरान अश्व अनुसंधान केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. नवीन कुमार पशुओं की जान बचाने के लिए वैक्सीन के शोध में लगे थे। रविवार को उन्हें नई दिल्ली में आईसीआर की तरफ से आयोजित कार्यक्रम में लंपी बीमार की वैक्सीन बनाने के लिए अवॉर्ड ऑफ एक्सीलेंस इन एग्रीकल्चरल रिसर्च एंड टेक्नालॉजी पुरस्कार प्रदान किया गया। डॉ. नवीन ने पशुओं को कोरोना से बचाने के लिए भी वैक्सीन बनाई है।
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अमेरिका व जर्मनी में शोध कर चुके डॉ. नवीन कुमार वर्ष 2011 से भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वर्तमान में अश्व अनुसंधान केंद्र के सूक्ष्मजीवी भंडारण केंद्र (एनसीवीटीसी) में प्रधान वैज्ञानिक/ विभागाध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं। गोवंश में फैली महामारी लंपी ने देश में कहर बरपाया तो इनकी नेतृत्व में वैक्सीन पर शोध शुरू हुआ। इनकी टीम द्वारा विकसित पूर्णत: स्वदेशी वैक्सीन लंपी प्रोवैक आईएनडी काे पिछले साल 10 अगस्त को जारी किया गया था। इस वैक्सीन की डोज 7 राज्यों के 2.75 लाख पशुओं को दी गई, जिसका परिणाम 99.99 प्रतिशत सही रहा है। वैक्सीन के व्यावसायिक उत्पादन के लिए बायोवेट प्राइवेट लिमिटेड बंगलूरू, हेस्टर बायोसाइंसेज अहमदाबाद, इण्डियन इम्यूनोलॉजिकल हैदराबाद समेत कई कंपनियों ने फार्मूला खरीदा है।
साथी वैज्ञानिकों ने दिया हर वक्त सहयोग
डॉ. नवीन को अपना शोध कार्य पूरा करने में डॉ. संजय बरुआ, डॉ. यशपाल, डॉ. अमित कुमार, डॉ. केपी सिंह, डॉ. सुकदेब नंदी एवं डॉ. त्रिवेणी दत्त का विशेष सहयोग मिला। तत्कालीन निदेशक डॉ. यशपाल शर्मा एवं वर्तमान निदेशक डॉ. टीके भट्टाचार्य के साथ-साथ भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के उपमहानिदेशक और वर्तमान में जम्मू कृषि विश्वविद्यालय के उपकुलपति डॉ बीएन त्रिपाठी ने भी नियमित रूप से वैक्सीन निर्माण में सहयोग देते हुए उत्साह बढ़ाया।
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डॉ. अशोक बल्हारा ने भैंस की गर्भ जांच किट की तकनीक की विकसित
केंद्रीय भैंस अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. अशोक बल्हारा को गर्भ जांच किट की तकनीक विकसित करने पर अवार्ड ऑफ एक्सीलेंस पुरस्कार दिया गया। रविवार को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के स्थापना दिवस कार्यक्रम में यह अवार्ड दिया गया।
संस्थान के निदेशक डाॅ. तीर्थ कुमार दत्ता और शरीर क्रिया विज्ञान और प्रजनन विभाग के अध्यक्ष डॉ सज्जन सिंह ने बताया कि गर्भ जांच किट बनाकर पशुपालकों की बहुत बड़ी समस्या का समाधान किया है। जल्द ही यह किट पशुपालकों को उपलब्ध करा दी जाएगी। डॉ. अशोक बल्हारा ने करीब 15 साल की मेहनत कर इस किट को बनाया है। यूरिन टेस्ट पर आधारित इस किट से आधे घंटे में पशुओं के गर्भधारण की पुष्टि हो जाती है। यह किट अभी गाय-भैंस के अलावा हिमालयी क्षेत्र में पाए जाने वाले पशु मिथुन के लिए उपयुक्त है।
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