अब समय आ गया किसान पुत्रों को अपने उत्पाद की मार्केटिंग करनी होगी। अखिल भारतीय अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) कृषि मार्केटिंग प्रबंधन के कोर्स डिजाइन करे। किसानों के बच्चाें को खेती से जुड़े उद्योगों को आगे बढ़ाना होगा। आईआईटी-आईआईएम से डिग्रीधारक युवा जब कृषि-उद्योगाें को चला रहे हैं तो किसानों के बेटों को भी अपनाना चाहिए।
किसानों को समूह बनाकर सहकारी योजनाओं को फायदा लेना चाहिए। यह कहना है देश के उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का। उन्होंने कहा कि भारत 2030 तक तीसरी आर्थिक महाशक्ति और 2047 में विकसित भारत विश्वगुरु होगा। इसमें सबसे बड़ी आहुति किसानों की होगी।
मंगलवार को केंद्रीय भैंस अनुसंधान केंद्र में पहुंचे उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी ने जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान, जय अनुसंधान का नारा दिया है। किसानों को अब मार्केटिंग मैकेनिज्म अपनाना होगा। अपने उत्पाद की मलाई भी लेनी होगी। किसानों को तीन सूत्रों पर काम करना होगा। पहला कृषि मंडियों के व्यापार में अपनी भागीदारी बढ़ानी होगी।
दूसरा अपनी फसलों के उत्पाद में वैल्यू एड करना होगा। तीसरा किसानों के बच्चों के लिए कृषि संस्थानों को मार्केटिंग से जुड़े नए कोर्स करने चाहिए। अनाज, दूध, सब्जी का करोड़ाें-अरबों का कारोबार है। अमूल ने जो किया वह पूरे देश को करना होगा। समूह बनाकर काम करेंगे तो अधिक फायदा होगा। केंद्र सरकार की ओर से नए बनाए गए सहकारी विभाग की योजनाओं का फायदा उठाएं।
किसानों के कर्ज को उतारूंगा
उन्होंने कहा कि नई तकनीक को अपनाकर अपनी फसलों की मार्केटिंग करें। फसल उत्पादन के आयात पर भी फोकस करें। पीएम नरेंद्र मोदी की पहल के अनुसार हर गांव में महिलाओं को ड्रोन दिए जा रहे हैं। भारत की असली रीढ़ किसान ही हैं। किसान सबसे अधिक मेहनत करता है तो किसान के सामने सबसे अधिक चुनौती भी है। गांवों को आत्मनिर्भर बनाना होगा। गांव में बाहर से सब्जी, मसाले, दूध, पनीर लाने के बजाय गांव में ही छोटे उद्योग स्थापित करें। वेयर हाउस की पालिसी में किसान कहीं नहीं दिखता। हमें अपनी सोच बदलनी होगी, किसान के पढ़े लिखे बच्चों को खेती में आना चाहिए। उप राष्ट्रपति ने कहा कि मैं एलएलबी वकील हूं, सांसद, राज्यपाल रह चुका हूं। जब पीएम ने राज्यसभा में उप राष्ट्रपति के तौर पर मेरा परिचय कराया तो उन्होंने किसान पुत्र बताया। मैं किसानों के कर्ज को उतारूंगा।
व्यवस्था से नाखुश दिखे उप राष्ट्रपति
उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ व्यवस्थाओं से नाखुश दिखे। उन्होंने मंच से कहा कि ये क्या व्यवस्था है चारों ओर सफेद टैंट लगा दिया। मैंने पौधरोपण किया, वहां भी व्यवस्था नहीं थी। यहां एलईडी, पोस्टर, बैनर के जरिये किसानों के लिए जानकारी होनी चाहिए थी। किसानों के लिए कृषि साहित्य होना चाहिए था। किसान इस परिसर में घुसे तो ही उसे लगे कि कोई जानकारी लेकर जा रहा हूं। अगली बार आऊंगा तो लंबे समय तक रूकूंगा। व्यवस्था पूरी तरह से बदली होनी चाहिए।
किसानों को हर मामले में बनाना है आत्मनिर्भर : कैलाश चौधरी
केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी ने कहा कि भारत विकसित राष्ट्र बनेगा तो उसमें सबसे अहम भूमिका किसानों की होगी। जब देश आजाद हुआ तो जीडीपी का 50 प्रतिशत हिस्सा कृषि पर आधारित था। हमें किसानों को हर मामले में आत्मनिर्भर बनाना होगा। पिछले दस साल में हम 10वीं से 5वीं अर्थव्यवस्था बन चुके हैं। जल्द ही तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्ति होंगे।
इस मौके पर राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय, शहरी निकाय मंत्री डॉ. कमल गुप्ता, उप राष्ट्रपति की पत्नी सुदेश धनखड़, केंद्रीय भैंस अनुसंधान केंद्र के निदेशक टीके दत्ता, लुवास कुलपति प्रो. विनोद कुमार वर्मा, केंद्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र के निदेशक टीके भट्टाचार्य आदि मौजूद रहे।