प्रेस वार्ता करते शिक्षा मंत्री कंवरपाल गुर्जर।
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हरियाणा प्रदेश के शिक्षा मंत्री कंवरपाल गुर्जर बुधवार को हिसार भाजपा कार्यालय पहुंचे। इस दौरान मंत्री ने कहा कि बालसमंद में जल्द ही सरकारी कॉलेज का अपना भवन होगा। मीडिया ने उनसे बरोदा उपचुनाव के समय कॉलेज के वादे पर सवाल पूछा। मंत्री ने कहा कि वादा पूरा हो चुका है, चाहे विधायक से पूछ लो। इस पर एक मीडिया कर्मी ने बरोदा के विधायक को फोन मिलाया तो विधायक ने जवाब दिया कि कॉलेज नहीं बना है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस व आम आदमी पार्टी स्कूल बंद करने की अफवाह फैलाकर जनता को गुमराह कर रही हैं। कोई स्कूल बंद नहीं किया है। हमने आठ साल में 71 कॉलेज खोले हैं। हर ब्लॉक में एक मॉडल स्कूल खोलना एतिहासिक निर्णय है। सुपर 100 को सुपर 600 बना दिया है। मीडिया कर्मियों ने बरोदा उपचुनाव के दौरान वहां कॉलेज व यूनिवर्सिटी बनाने के वादे पर सवाल पूछा तो मंत्री ने कहा कॉलेज बना दिया। विधायक मिठाई का डिब्बा लेकर आया था।
मंत्री बोले-हां जी भालू जी, यूनिवर्सिटी वाला काम हो गया ना, विधायक बोले- ना जी
मीडिया कर्मी ने सोनीपत जिले की विधानसभा सीट बरोदा के विधायक इंदुराज नरवाल को फोन मिलाकर स्पीकर पर डाल दिया। मंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेस में विधायक इंदुराज नरवाल से पूछा कि हां जी भालू जी, तेरी यूनिवर्सिटी वाला काम कर दिया ना, विधायक बोले ना, कित कर दिया भाई साहब। मंत्री हंसते हुए बोले उस दिन तूं मिठाई का डिब्बा लेकर आया था, विधायक ने कहा वो तो स्कूल का मामला था जी।
अध्यापक पढ़ाने के लिए लगते हैं उन्हें प्रमोशन की क्या जरूरत है : शिक्षा मंत्री
अध्यापक पढ़ाने के लिए होते हैं उन्हें प्रमोशन की क्या जरूरत है। हमने हरियाणा में एक भी स्कूल बंद नहीं किया है। जिन स्कूलों में 20 से कम विद्यार्थी थे उन स्कूलों को नजदीकी स्कूलों में मर्ज किया है। स्कूल मर्ज करने का मतलब स्कूल बंद करना नहीं होता।
अलग-अलग स्कूल होने से उनमें अलग-अलग हेड टीचर भी होते हैं। स्कूल मर्ज होने के बाद एक स्कूल में एक ही प्रिंसिपल होगा। एक स्कूल में एक प्रिंसिपल व तीन हेड टीचर होना गलत है। यह कहना है प्रदेश के शिक्षा मंत्री कंवर पाल गुर्जर का।
वे बुधवार को जिला भाजपा कार्यालय में मीडिया से बातचीत कर रहे थे। शिक्षा मंत्री ने कबूल किया कि हरियाणा में शिक्षकों की कमी है। खाली पदों को भरने के लिए हरियाणा सरकार ने 4676 पीजीटी व 7481 टीजीटी शिक्षकों की भर्ती निकाली है। अगर कोई विद्यार्थी टैब का मिस यूज करता है तो इसकी जिम्मेदारी अभिभावकों की भी बनती। सारी जिम्मेदारी सरकार की भी नहीं होती।