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Elections 2024: हिसार की सियासी लड़ाई निर्दलीयों ने रोचक बनाई, देश की सबसे अमीर महिला से कांग्रेस-भाजपा चिंतित

Thu, 19 Sep 2024 05:59 AM IST
दुष्यंत शर्मा गुरदीप सिंह, हिसार

सार

देश की सबसे अमीर महिला और पूर्व मंत्री सावित्री जिंदल ने निर्दलीय मैदान में उतरकर भाजपा-कांग्रेस की चिंता बढ़ा दी है। दो बार के विधायक व भाजपा प्रत्याशी डॉ. कमल गुप्ता के सामने तीसरी बार कमल खिलाने की चुनौती है, तो रामनिवास राड़ा कांग्रेस के एक दशक से जारी सूखे को खत्म करने की जुगत में हैं।
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सावित्री जिंदल, कमल गुप्ता,. गौतम सरदाना और रामनिवास राड़ा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिसार सीट की सियासी लड़ाई को निर्दलीय प्रत्याशियों ने रोचक बना दिया है। देश की सबसे अमीर महिला और पूर्व मंत्री सावित्री जिंदल ने निर्दलीय मैदान में उतरकर भाजपा-कांग्रेस की चिंता बढ़ा दी है। दो बार के विधायक व भाजपा प्रत्याशी डॉ. कमल गुप्ता के सामने तीसरी बार कमल खिलाने की चुनौती है, तो रामनिवास राड़ा कांग्रेस के एक दशक से जारी सूखे को खत्म करने की जुगत में हैं। राड़ा के सामने बड़ा सवाल खुद को साबित करने का भी है, क्योंकि कांग्रेस ने सैनी समाज के प्रत्याशी पर एक बार फिर दांव खेला है। यूं तो हिसार सीट पर 21 प्रत्याशी मैदान में हैं, पर असल मुकाबला सावित्री, राड़ा व गुप्ता के बीच ही है। हालांकि, पूर्व मेयर गौतम सरदाना ने इस त्रिकोणीय लड़ाई में निर्दलीय उतर कर तड़का जरूर लगा दिया है।

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भाजपा से टिकट न मिलने पर मैदान में उतरीं सावित्री जिंदल के सामने वजूद की लड़ाई है। वह जिस जिंदल घराने से  हैं, हिसार की राजनीति को उससे जुदा करके नहीं देखा जा सकता। छह चुनाव में से पांच बार जीत दर्ज करने वाले जिंदल परिवार का बड़ा सियासी रसूख है। इस सीट पर सबसे बड़ी जीत का रिकॉर्ड भी सावित्री के नाम है। इस बार वह 2014 में  कमल गुप्ता से मिली हार का बदला भी लेना चाहेंगी। उधर, भाजपा को सबसे बड़ा खतरा  बागियों से है। संघ के करीबी कमल गुप्ता टिकट बचाने में तो कामयाब रहे, पर उनकी जीत की राह में सबसे बड़ी बाधा भाजपा से ही नाराज सावित्री व सरदाना हैं। वहीं, कांग्रेस में राड़ा को सांसद सैलजा का विश्वासपात्र होने का लाभ मिला है। अब उनकी कोशिश ओबीसी वोटर को एकजुट करने व अपनी बिरादरी का कैडर वोट बचाने की है। टिकट न मिलने से हताश व्यापार मंडल के प्रांतीय अध्यक्ष बजरंग गर्ग को साथ लेकर चलना भी राड़ा के लिए चुनौती भरा रहेगा।

सरदाना भी बिगाड़ रहे समीकरण
गौतम सरदाना मुख्य मुकाबले में भले न हों, लेकिन समीकरण बिगाड़ने में सक्षम हैं। उनके मैदान में आने से पंजाबी समाज का वोट जो कमल गुप्ता, सावित्री या राड़ा को मिलना था, वह कम हो जाएगा। वर्ष 2014 के चुनाव में सावित्री जिंदल से महज 500-600 वोटों के अंतर से गौतम तीसरे नंबर पर थे। हालांकि, पांच साल मेयर रहते हुए जनता के काम नहीं करने के आरोप भी उन पर लग रहे हैं। ऐसे में आम मतदाता उनसे किनारा कर सकता है।
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वैश्य मतदाता सजाते हैं जीत का सेहरा
हिसार शहर में सबसे अधिक करीब 30 हजार वैश्य, 24 हजार पंजाबी, 17 हजार सैनी, 13 हजार जाट और लगभग 10 हजार ब्राह्मण मतदाता हैं। माना जाता है कि वैश्य समाज का वोट जिसकी झोली में जाता है, जीत का सेहरा उसी के सिर सजता है। वैश्य के साथ पंजाबी व ब्राह्मण मतदाता का साथ मिल जाए तो जीत का अंतर और बढ़ जाता है। यानी वैश्य, ब्राह्मण और पंजाबी वोटर ही यहां की हार-जीत तय करते हैं।

  • हिसार विधानसभा सीट पर 1951 से अब तक 17 बार चुनाव हुए हैं। इनमें 14 बार वैश्य, दो बार पंजाबी, एक बार सैनी प्रत्याशी को जीत मिली है।


चतुष्कोणीय लड़ाई में करीबी अंतर से होगी हार-जीत
चौधरी बंसीलाल के राजनीतिक सलाहकार रहे मास्टर हरि सिंह शहर में चतुष्कोणीय मुकाबला मान रहे हैं। वह कहते हैं कि यहां निर्दलीयों के रूप में दो मजबूत प्रत्याशियों ने लड़ाई को न सिर्फ रोचक बना दिया है, बल्कि कांग्रेस-भाजपा के आमने-सामने के मुकाबले को बिगाड़ दिया है। हार-जीत का अंतर बहुत ज्यादा नहीं रहेगा। जनता सावित्री और गौतम को भी भाजपा के अघोषित प्रत्याशी के तौर पर ही देख रही है। वैश्य मतदाताओं की पहली पसंद सावित्री ही रहेंगी। पंजाबी समाज गौतम को आएगा। राड़ा को सैनी, जाट के अलावा अनुसूचित वर्ग का साथ मिलेगा। डॉ. कमल गुप्ता के पक्ष में भाजपा का कैडर वोट ही अधिक रहेगा।

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