हिसार। सातरोड में कचरा प्रोसेसिंग प्लांट को लेकर चल रहा विवाद आखिरकार सुलझ गया। निगम की ओर से प्लांट गांव में नहीं बनाने की बात पर ग्रामीणों ने मंगलवार शाम को धरना समाप्त कर दिया। प्लांट की जगह एयरपोर्ट के निर्धारित दायरे में आने के बावजूद निगम अधिकारियों ने काम शुरू करने से पहले एयरपोर्ट अथॉरिटी से अनुमति तक नहीं ली। इस पर एयरपोर्ट अथाॅरिटी ने आपत्ति जताई, जिस कारण निगम को सातरोड में यह प्लांट बनाने का फैसला रद्द करना पड़ा। वहीं, इस मामले में राजनीतिक दबाव भी रहा, जिससे निगम प्रशासन को अपने कदम पीछे खींचने को मजबूर होना पड़ा।
निगम ने वार्ड एक से वार्ड-10 के घरों से कचरा उठाने का काम एक निजी एजेंसी को दिया हुआ है। निगम अधिकारियों की मानें तो टेंडर की शर्त के अनुसार एजेंसी को कचरा प्रोसेस करने के लिए जगह निगम की तरफ से उपलब्ध करवाई जानी है। इसके लिए निगम ने पहले नेशनल हाईवे किनारे बने बिजली के सब स्टेशन व सातरोड के जलघर के पास जमीन का चयन किया था। मगर ग्रामीणोंने इसका विरोध कर दिया था। इस कारण निगम प्रशासन को इस जगह को रद्द करना पड़ा था। इसी बीच एजेंसी ने कचरा उठाने का काम बंद कर दिया। इसके बाद निगम अधिकारियों ने राधा स्वामी सत्संग आश्रम के पास प्लांट बनाने का फैसला किया था। यहां भी सातरोड के लोगों ने विरोध कर दिया था और 18 जून से धरने पर बैठ गए थे।
दिन भरा चला हाईवोल्टेज ड्रामा
इस मामले को लेकर मंगलवार को दिनभर हाईवोल्टेज ड्रामा चला। सुबह एयरपोर्ट अथॉरिटी की ओर से प्लांट निर्माण पर आपत्ति जताने के बाद निगम अधिकारी एनओसी लेने के लिए दौड़े, लेकिन बात नहीं बनी। एयरपोर्ट अधिकारियों ने निगम को स्पष्ट कर दिया कि किसी भी सूरत में इस जगह पर प्रोसेसिंग प्लांट नहीं लग सकता। उधर, इस मामले को लेकर भाजपा के जिला पदाधिकारी भी निगम कार्यालय पहुंचे और निगम के उच्च अधिकारी से बातचीत की। सूत्रों की मानें तो भाजपा पदाधिकारी ने निगम प्रशासन को प्लांट का निर्माण कार्य बंद करवाने को कहा। इसके बाद भी भाजपा जिला कार्यालय में पदाधिकारियों व पार्टी नेताओं के बीच इस मामले को लेकर काफी विचार विमर्श हुआ। आखिर में शाम को भाजपा जिला अध्यक्ष कैप्टन भूपेन्द्र धरनास्थल पर पहुंचे और सातरोड में कचरा प्रोसेसिंग प्लांट न लगाने का आश्वासन देकर धरना समाप्त कराया।
निगम अधिकारियों की ये रही लापरवाही
एयरपोर्ट अथॉरिटी की तरफ से जारी किए निर्देशों के मुताबिक एयरपोर्ट के 10 किलोमीटर के दायरे में कचरा प्रोसेसिंग प्लांट नहीं बनाया जा सकता। निगम की तकनीकी शाखा को इस बारे में पूरी जानकारी भी थी। इसी वजह से निगम को ढंढूर में सॉलिड वेस्ट प्लांट लगाने का प्रोजेक्ट रद्द करना पड़ा था। मगर सातरोड में प्रोसेसिंग प्लांट के लिए जगह फाइनल करते समय अधिकारियों ने इस नियम की पूरी तरह से अनदेखी की, जिस कारण यह पूरा ड्रामा हुआ।
मामले में छाई रही राजनीति
चूंकि अब नगर निगम व विधानसभा चुनाव में ज्यादा समय नहीं बचा है। चुनाव लड़ने के इच्छुक नेताओं ने इस मामले में पूरी तरह से राजनीति की। जहां सरकार के नुमाइंदों को इस मामले में निगम की पैरवी करनी थी, वो ही इसके विरोध में खड़े हो गए। इसमें पार्षद से लेकर जिला स्तर के पदाधिकारी तक शामिल रहे। यही नहीं इस प्लांट को यहां न बनाने को लेकर निगम प्रशासन पर दबाव भी बनाया गया।
शहर को यह होगा नुकसान
इस प्लांट के न बनने से एजेंसी शहर के निकलने वाले कचरा का निपटान नहीं कर सकेगी, जिससे ढंढूर की तरह फिर से कचरे के ढेर लग जाएंगे। इसका नुकसान शहर को स्वच्छता सर्वेक्षण में भी उठाना पड़ सकता है। उधर, जब तक एजेंसी कचरे का निपटान शुरू नहीं करती तब तक निगम उसे पेमेंट नहीं करेगा। ऐसे में या तो एजेंसी को पेमेंट के लिए कोर्ट का सहारा लेना पड़ेगा या फिर उसे टेंडर छोड़ना पड़ेगा।
अब निगम इन विकल्पों पर करेगा विचार
निगम एजेंसी को अपने स्तर पर ही जमीन देखने को कह सकता है। हालांकि इस मामले में निगम को मुख्यालय से अनुमति लेनी पड़ सकती है। निगम 1 से 10 वार्ड के बाद 11 से 20 वार्ड का भी डोर टू डोर कचरा एकत्रित करने का टेंडर लगाने की तैयारी कर रहा था, लेकिन अब शायद निगम अपने इस फैसले को भी रद्द करेगा। निगम बाकी बचे वार्डों में अपने ही कर्मचारियों से सफाई कार्य करवाएगा। चूंकि निगम के पास पर्याप्त सफाई कर्मचारी नहीं है, ऐसे में वह कौशल निगम के माध्यम से सफाई कर्मचारी ले सकता है।
प्लांट वाली जगह एयरपोर्ट के दायरे में आ गई है। चूंकि यह प्लांट एक अस्थायी प्लांट था तो अधिकारियों ने इसके लिए एयरपोर्ट ऑथोरिटी की अनुमति लेना मुनासिब नहीं समझा। अब एयरपोर्ट ने इस पर आपत्ति उठा दी है। दूसरी तरफ सातरोड़ के लोग भी इसका विरोध कर रहे थे। इसे देखते हुए हमने इस जगह पर प्रोसेसिंग प्लांट बनाने का फैसला टाल दिया है। अब हम अन्य विकल्पाें पर विचार करेंगे।
- प्रदीप दहिया, निगमायुक्त