हिसार। 19 वर्षीय युवती से दुष्कर्म, जबरन गर्भपात और गैर इरादतन हत्या के मामले में पीसी-पीएनडीटी टीम ने अपनी जांच करीबन पूरी कर ली है। अब जांच रिपोर्ट सीएमओ को सौंपी जाएगी। इसके बाद सीएमओ अपनी राय देंगे। पीएनडीटी टीम ने 7 अस्पतालों और 2 अल्ट्रासाउंड का रिकॉर्ड एकत्रित किया है। टीम ने अभी तक की जांच में 7 अस्पतालों की कार्य प्रणाली पर संदेह जताया है। वहीं, टीम ने युवती के परिजनों के दोबारा बयान दर्ज किए हैं।
20 मार्च को उपचार के दौरान हुई थी मौत
सदर थाना पुलिस को दिए बयान में पीड़िता के भाई ने बताया था कि 22 फरवरी उनको पता चला की उसकी अविवाहित बहन गर्भवती है। जब इस बारे में पूछा तो उसने बताया कि अनिल के भांजे इशु ने शादी का झांसा देकर उसके साथ कई बार दुष्कर्म किया था, जिससे वह गर्भवती हो गई थी। उसके बाद परिजन लड़की का गर्भपात करवाने पड़ाव चौक के नजदीक एक अस्पताल ले गए। यहां पर चिकित्सक ने गर्भपात करने के लिए 35 हजार रुपये मांगे। आरोप है कि महिला चिकित्सक ने जबरदस्ती गर्भपात का प्रयास किया और तीसरे दिन उपचार होने की बात कहकर छुट्टी दे दी,। 27 फरवरी को अस्पताल में आए तो लड़की को अल्ट्रासाउंड कराने के लिए आजाद नगर में भेज दिया। वहां जाने पर स्टाफ ने अल्ट्रासाऊंड करने से इन्कार कर दिया था।
इसके बाद आजाद नगर के दूसरे अस्पताल में गए तो चिकित्सक ने जांच के बाद बताया कि गर्भपात हुआ ही नहीं। अब ऑपरेशन करना पड़ेगा। इसके बाद 14 मार्च को पड़ाव के उसी अस्पताल में 50 हजार रुपये जमा करवा उपचार शुरू करवाया। चिकित्सक अगले दिन उसे कस्बे के एक अस्पताल में ले गया। तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर 16 मार्च को बहन को नागरिक अस्पताल में दाखिल कराया। इसके बाद मामला सामने आया। स्ववास्थ्य विभाग की टीम ने युवती की हालत गंभीर होने पर मेडिकल कॉलेज अग्रोहा में रेफर कराया, जहां उसके पेट से एक भ्रूण निकाला गया और 20 मार्च को उसकी मौत हो गई थी।
जांच लगभग पूरी हो चुकी है। रिपोर्ट सीएमओ को सौंप दी जाएगी। उसके बाद आगे की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। - डॉ. प्रभुदयाल, नोडल अधिकारी