मुझे उत्तराखंडी लोक गायक होने पर बहुत गर्व है। हमारे पहाड़ों के गीत आज पूरे भारत में चाव से सुने जाते हैं। इसका श्रेय लोक कलाकारों व गायकों को जाता है। इसके बावजूद भी सरकार की ओर से लोक गायकों को ज्यादा सहयोग नहीं मिल पा रहा है। हमारी मांग है कि सरकार एक कारगर पॉलिसी बनाकर लोक कलाकारों व गायकों को प्रोत्साहन दें। लोक गायकों को सरकारी रोजगार का अवसर मिलना चाहिए। रोजगार के अभाव में लोक गायकों व लोक कलाकारों को यूट्यूब सहित अन्य सोशल मीडिया की ओर रुख करना पड़ रहा है।
मैंने वरिष्ठ लोक गायकों को सुनकर ही गाना सीखा है। गायकी बहुत बड़ी विधा है, हम तो अभी तक संगीत की एबीसीडी भी नहीं सीख पाए हैं। मेरा लोक गीत रोडवेज व चाह का होटल अभी रिलीज हुआ है। इन्ही के कारण लोग मुझे पहचानने लगे हैं। आज हिसार हरियाणा में आकर मैे मुझे बहुत गर्व महसूस हो रहा है कि इतने बड़े मंच पर मैंने प्रस्तुति दी है। लोकगीतों में प्राचीन परंपराए, रिति-रिवाज, धार्मिक एवं सामाजिक जीवन के साथ अपनी संस्कृति दिखाई देती है। साहित्य की प्रमुख विधाओं में लोकगीतों का स्थान सर्वोपरी है।
उत्तराखंड हमेशा से ही लोक संगीत का धनी रहा है। फिर चाहे उसकी बोली गढ़वाली हो, कुमांऊनी हो या फिर जौनसारी। शादी के समय मंगल गीत का गाना या फिर खेतों में काम करते हुए विशेषकर धान की रुपाई करते हुए गीत गाना बहुत ही आकर्षण का केंद्र रहता है। लोक संस्कृति को पीढ़ी दर पीढ़ी जीवंत रखने में लोक गायकों की अहम भूमिका रही है। इस कारण सरकार को लोक गायकों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने चाहिए।