नहर पर मोरी खोलने का प्रयास करते हुए किसान।
हांसी। अन्नदाता को सरकारी अधिकारियों की लापरवाही के कारण खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। गेहूं की फसल निकालने के बाद किसान नहर में पानी आने का इंतजार कर रहे थे, लेकिन मोरी बंद होने के कारण देपल-ढंढेरी के किसानों को समस्या हो रही है।
39 दिनों बाद पेटवाड़ डिस्ट्रीब्यूटरी नहर में पानी आया। पानी छोड़ने के साथ ही नहर में जमा गंदगी के कारण देपल-ढ़ढेरी के खेतों में पड़ने वाली मोरी ब्लॉक हो गई। जानकारी मिलने पर मोरी खोलने के लिए दोनों गांवों के किसान करीब 18 घंटे से लगे हुए हैं। परंतु उन्हें सफलता हाथ नहीं लगी। यहां तक की दोनों गांव के किसान प्रशासन के अधिकारियों से भी गुहार लगा चुके हैं। ताकि वे अपने खेतों की सिंचाई कर कपास की फसल उगा सके। परंतु डिस्ट्रीब्यूटरी पर तैनात बेलदारों ने भी अपना पूरा प्रयास किया वह भी कामयाब नहीं हुए। खेतों में नहरी पानी से सिंचाई की उम्मीद लेकर बैठे किसान प्रशासन से उम्मीद छोड़ चुके हैं और मजबूरन आंदोलन के लिए रुख कर सकते हैं।
नहर पर मौजूद किसान रणबीर मलिक, साधु व राजेंद्र का कहना है कि गांव के किसान केवल नहरी पानी पर निर्भर है। नहरी पानी के लिए वे पिछले करीब एक महीने से इंतजार कर रहे थे। परंतु जब नहर में पानी छोड़ा गया तो उन्हें एक आस जगी थी कि अब उनके खेतों में कपास की फसल की बिजाई हो सकेगी। परंतु नहरी विभाग की लापरवाही के कारण उनके खेत सूखे रह गए हैं। उन्होंने बताया कि इस मोरी पर तीन गांव की सैकड़ों एकड़ जमीन में पानी जाता है। नहरी पानी न मिलने से बिजाई में देरी होगी और इसका प्रभाव पैदावार पर पड़ेगा।
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किसानों को पाइप ऊपर से लगाने के लिए बोला गया है। उन्होंने मोरी को खुलवाने में पुरा प्रयास किया। उन्होंने कर्मचारियों को भी लगाया गया था। -
प्रतीक, जेई नहरी विभाग हांसी।