प्रदेश सरकार के मेरी फसल-मेरा ब्योरा (एमएफएमबी) पोर्टल पर 65 हजार एकड़ जमीन का दूसरे जिले के लोगों ने फसलों का पंजीकरण कराया है। प्रशासनिक अधिकारी अब पूरे रिकॉर्ड को परिवार पहचान पत्र के डाटा के साथ मिलान कर रहे हैं। इसमें बाजरा, कपास की फसल पर सबसे अधिक पंजीकरण किया गया है। इसमें भावांतर भरपाई योजना का फायदा लेने के लिए फर्जी पंजीकरण किए गए हैं।
प्रदेश सरकार ने मेरी फसल मेरा-ब्योरा पोर्टल बनाया हुआ है। इसमें किसान अपनी फसल का पंजीकरण करते हैं। यहां कराए गए पंजीकरण के आधार पर किसानों को फसल की ब्रिकी होती है। इसी डाटा के आधार पर सरकार किसानों को भावांतर भरपाई योजना का पैसा भी जारी करती है। पिछले दिनों किसानों ने शिकायत दी थी कि वे पोर्टल पर पंजीकरण नहीं कर पा रहे हैं। इसके बाद प्रशासन ने पोर्टल पर पंजीकृत किसानों की सत्यापन प्रक्रिया शुरू की। इसमें पाया गया कि किसानों की फसलों का पंजीकरण दूसरे जिलों के अन्य लोगों के नाम पर पहले से ही पोर्टल पर अपने नाम से पंजीकृत किया हुआ है। किसानों के भूमि रिकॉर्ड और परिवार पहचान पत्र डेटा प्राप्त कर उनकी खरीफ फसलों मुख्य रूप से बाजरा को दूसरों के नाम पर पंजीकृत किया गया है। आरोपियों ने अपना विवरण और बैंक खाते भरे हैं। पिछले दिनों एचएयू में आयोजित कृषि मेले में आए किसानों ने यह मामला प्रदेश के कृषि मंत्री जेपी दलाल के सामने भी उठाया था।
किसी ने 13 तो किसी ने 15 बार करा रखा है पंजीकरण
पोर्टल पर पंजीकरण के सत्यापन के दौरान पाया गया कि नूंह जिले के पुन्हाना ब्लॉक के निवासी अलीशेर ने खुद को हिसार का किसान दिखा कर पंजीकरण कराया है। इस गांव में कई किसानों की कई एकड़ जमीन पंजीकृत की थी। एक महिला राहिला ने बांडाहेड़ी गांव में कई एकड़ में बाजरे की फसल उगाने वाले किसान के तौर पर 13 बार अपना पंजीकरण कराया है। लोहारू ब्लॉक के राहुल ने बांडाहेड़ी में कई एकड़ में 15 बार पंजीकरण कराया है।
किसान अनिल गोरछी ने बताया कि किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। पहले मौसम के कारण फसलें खराब हो गई। कपास में गुलाबी सुंडी ने बहुत नुकसान पहुंचाया है। अब घोटाले के कारण परेशान हो गए हैं। पोर्टल पर फर्जी पंजीकरण हो रहे हैं। हमें नहीं लगता कि अब भावांतर भरपाई योजना का लाभ किसानों को मिल पाएगा। हकदार किसान वंचित हो जाएंगे।
एमएफएमबी डेटा के सत्यापन की प्रक्रिया चल रही है। दूसरे जिलों के काफी लोगों ने खुद को हिसार जिले में किसान बताते हुए पंजीकृत कराया है। करीब 65 हजार एकड़ में ऐसे किसानों की फसल पंजीकृत कराई गई है। जल्द ही फाइनल रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को सौंप देंगे। - चेतना चौधरी, जिला राजस्व अधिकारी, हिसार।