नारनौंद। खेड़ी चौपटा में शुक्रवार को किसानों व प्रशासन के बीच हुए टकराव के बाद शनिवार को किसानों का शांतिपूर्ण तरीके से धरना जारी रहा। मामले को लेकर प्रशासन भी दिनभर अलर्ट रहा। वहीं प्रशासन की तरफ से अभी तक किसानों पर किसी प्रकार की कोई कार्रवाई नहीं की गई है। शुक्रवार देर रात तक किसानों के साथ हुई मीटिंग में उपायुक्त उत्तम सिंह ने जिले में लगाई गई धारा 144 का हवाला देते हुए किसानों से भी सहयोग की अपील की थी। शनिवार को खेड़ी चौपटा धरने पर सैकड़ो ट्रैक्टर और किसनों का धरना जारी रहा।
किसान नेता सुरेश कोथ व विकास सीसर ने बताया कि शनिवार को धरने की कमेटी द्वारा यह फैसला लिया गया है कि यहीं पक्के मोर्चे पर शांतिपूर्ण तरीके से किसानों का धरना जारी रहेगा। शुक्रवार को हुए घटनाक्रम में करीब 50 किसानों को चोटें आई हैं। किसानों के दर्जनों बाइकों व ट्रैक्टरों को भी प्रशासन ने नुकसान पहुंचाया है। किसान बिल्कुल शांतिपूर्ण तरीके से अपना आंदोलन चला रहे हैं। किसान प्रशासन से किसी प्रकार का टकराव नहीं चाहता, लेकिन शुक्रवार की घटना में प्रशासन द्वारा किसानों पर लाठीचार्ज किया गया। किसानों को घरों के अंदर घुसकर पीटा गया, महिलाओं के साथ भी अभद्र व्यवहार पुलिस ने किया। निहत्थे किसानों पर आंसू गैस के गोले, वाटर कैनन, लाठियां व पत्थरों से पुलिस द्वारा हमला किया गया है। ज्यादा से ज्यादा गांव-गांव के किस हर रोज खेड़ी चौपटा धरने पर पहुंचकर मजबूती से अपनी मांगों को समर्थन दें। इस अवसर पर कुलदीप खरड़, रणबीर उमरा, धर्मपाल बडाला, सुंदर पनिहारी, बबलू मिर्चपुर, संदीप भारती, विकास राखी, वारिस डाटा, काला गामडा, दीपक पंडित, सतीश राजली, जय नारायण इत्यादि मौजूद रहे।
किसानों पर पैलेट गन से रबड़ या प्लास्टिक की गोलियां चलाकर खेड़ी चौपटा को जलियां वाला बाग बना दिया है। सरकार लोकतंत्र का गला घोंटने का काम कर रही है। पुलिस व किसानों के टकराव में किसानों के ट्रैक्टरों को भी नुकसान पहुंचा है। सरकार यह रवैया बेहद गलत व निंदनीय है। सरकार तुरंत प्रभाव से किसानों की जायज मांगों को मानकर इस टकराव को समाप्त करे और अन्नदाता को उसका हक दे।- उमेद लोहान, राष्ट्रीय प्रवक्ता, इनेलो।
सरकार व प्रशासन द्वारा किसानों के साथ बर्बरता पूर्ण व्यवहार करते हुए उन पर लाठियां भांजी गई। जिसमें बहुत सारे किसान गंभीर रूप से घायल हुए हैं। काफी किसानों को हिरासत में भी लिया गया था लेकिन किसानों के दबाव में उनको प्रशासन द्वारा रिहा करना पड़ा। सरकार देश के अन्नदाता को प्रताड़ित करने का काम कर रही है। जिसकी हम कड़े शब्दों में निंदा करते हैं।
सोनिया दूहन, नेत्री एनसीपी शरद पवार।