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कारगिल विजय दिवस: 23 साल बाद भी रुला रही शहीद की वो आखिरी चिट्ठी, पत्नी ने कही ये बात

Tue, 26 Jul 2022 02:14 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, हिसार (हरियाणा)

सार

घिराय गांव के महावीर बूरा कारगिल में शहीद हुए थे। शहीद की पत्नी बोलीं कि शहीद को सेना मेडल का एलान किया था, दुख है कि आज तक सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किया गया।
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शहीद महावीर बूरा का आखिरी पत्र व उनका फाइल फोटो। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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हिसार। वर्ष 1999 में पाकिस्तान के साथ हुए कारगिल युद्ध में घिराय गांव निवासी महावीर बूरा दुश्मनों से लड़ते हुए शहीद हो गए थे। 23 साल बाद बाद भी शहीद की पत्नी जावित्री देवी को उनकी लिखी चिट्ठी रुला जाती है। आखिरी चिट्ठी को उन्होंने आज तक संभाल कर रखा हुआ है। हर साल कारगिल दिवस पर अपने पति को याद करती हैं। उनके पत्र को देख कर फफक पड़ती हैं। बेटा कर्ण बूरा मां को सहारा देता है। अपने पिता के सपनों को पूरा करने का भरोसा दिलाता है।
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शहीद की पत्नी जावित्री देवी ने कहा कि उनके पति महावीर बूरा को सेना मेडल का एलान किया गया था, दुख है कि आज तक हरियाणा सरकार ने सेना मेडल को सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किया है। कई बार इस बारे में प्रशासनिक अधिकारियों को भी अवगत कराया। कर्ण ने बताया कि पिता की याद में हर वर्ष गांव में पौधरोपण कार्यक्रम अभियान के तहत उन्हें नमन करते हैं। पिछले साल लगाए गए पौधों की संभाल भी करते हैं। गांव में शहीद महावीर सिंह बूरा की याद में स्टेडियम बना है। स्टेडियम में शहीद की प्रतिमा लगी हुई है। गांव में राजकीय उच्च विद्यालय नाम शहीद महावीर बूरा के नाम से रखा गया है। पिछले दिनों स्कूल के मेन गेट से शहीद महावीर बूरा का नाम हटा दिया गया था। इसके बाद ग्रामीणों ने धरना प्रदर्शन करते हुए विरोध जताया। ग्रामीण शहीद के सम्मान के लिए अड़ गए तो स्कूल प्रशासन व शिक्षा विभाग ने अपनी गलती मान कर स्कूल के मेन गेट पर शहीद महावीर बूरा का नाम दोबारा से लिखा था।
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