हरियाणा के हिसार में जीआरपी के रिटायर्ड ईएसआई रघुबीर आत्महत्या प्रकरण में सोमवार को जीआरपी अंबाला कैंट की एसपी संगीता कालिया, डीएसपी गुरदयाल सिंह सहित सभी छह पुलिस कर्मचारियों के खिलाफ जीआरपी थाना हिसार में केस दर्ज किया गया है। इस बारे में मृतक के साले गांव बधावड़ निवासी सूबे सिंह ने सुसाइड नोट को आधार बनाकर आरोपियों पर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया था। दोपहर डेढ़ बजे रघुबीर के परिजनों व कमेटी सदस्यों को रेलवे पुलिस द्वारा एफआईआर की प्रति उपलब्ध कराई गई। इसके बाद करीब तीन बजे बिचपड़ी गांव में मृतक का अंतिम संस्कार किया गया।
बिचपड़ी गांव निवासी ईएसआई रघुबीर के आत्महत्या प्रकरण में कार्रवाई की मांग को लेकर परिजन व ग्रामीण शुक्रवार से पंचायत भवन परिसर में धरने पर बैठे थे। गृह मंत्री अनिल विज के हस्तक्षेप के बाद पुलिस अफसरों ने रविवार को केस दर्ज कराने का आश्वासन दे दिया था। लेकिन परिजन व पंचायत सदस्य एफआईआर की कॉपी मिलने पर ही धरना खत्म करने पर अड़े रहे।
सोमवार सुबह करीब नौ बजे से ग्रामीण बिचपड़ी के सामुदायिक भवन में एकत्रित हुए। इसके बाद करीब डेढ़ बजे पुलिस अफसरों ने जीआरपी थाना हिसार में दर्ज एफआईआर की प्रति परिजनों को सौंपी। बाद में परिजन नागरिक अस्पताल से शव लेकर गांव लौटे।
गांव की श्मशान भूमि में मृतक के बड़े बेटे अनिल ने मुखाग्नि दी। इस दौरान पुलिस प्रशासन की ओर से डीएसपी रोहताश सिहाग, थाना प्रभारी महेंद्र सिंह, रेलवे पुलिस के अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।
रिश्तेदार की तहरीर पर दर्ज हुआ केस
मृतक रघुबीर के साले व गांव बधावड़ निवासी सूबे सिंह के बयान व मौके पर मिले सुसाइड नोट के आधार पर रेलवे पुलिस मामला दर्ज किया है। एफआईआर में आईपीएस एसपी संगीता कालिया, डीएसपी गुरदयाल सिंह, सब इंस्पेक्टर/ रीडर कश्मीर सिंह, सब इंस्पेक्टर जोगिंदर सिंह, ईएसआई महेंद्र सिंह व एचसी सुरेंद्र कुमार के नाम शामिल हैं। सभी पर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप है।
रघुबीर के गुमनाम शिकायती पत्रों से खफा थे अफसर, कराया था मुकदमा
जीआरपी के ईएसआई रघुबीर और अफसरों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। बीते फरवरी में कई गुमनाम शिकायती पत्रों की जांच हुई तो पता लगा कि रघुबीर के रिश्तेदारों ने ही ये पत्र भेजे थे। डेढ़ साल में 10 गुमनाम शिकायती पत्र भेजे गए थे। इस पर रघुबीर व उनके एक रिश्तेदार के खिलाफ केस दर्ज करा दिया गया था। रघुबीर सिंह के साले सूबे सिंह के अनुसार जीआरपी के एचसी सुरेंद्र, महेंद्र और रघुबीर के बीच किसी बात को लेकर विवाद था। इसके अलावा वे एक ही जाति के लोगों के सभी महत्वपूर्ण पदों पर तैनाती से नाराज चल रहे थे।
उन्होंने अपने रिश्तेदारों के नाम से कई गुमनाम शिकायती पत्र वरिष्ठ अफसरों को भेजे थे। इस बीच रघुबीर का तबादला चंडीगढ़ हो गया। रघुबीर ने अपना तबादला वापस हिसार करवा लिया। रघुबीर ने 142 दिन का अवकाश ले लिया था। इधर, लगातार गोपनीय शिकायत पत्र मिलने पर एसपी संगीता कालिया ने इसकी जांच कराई तो गुमनाम पत्र भेजने वाले के तौर पर रघुबीर का नाम सामने आया। इस पर रघुबीर व उनके एक रिश्तेदार के खिलाफ केस दर्ज हो गया। इसमें जांच के दौरान एससी-एसटी एक्ट की धारा भी जोड़ दी गई। रघुबीर जीआरपी से 31 जनवरी 2023 को सेवानिवृत्त हो गए। इसके बाद इनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू हो गई।