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कंडक्टर-ड्राइवर को साढ़े आठ घंटे बनाया बंधक, चार एसआई आए छुड़ाने

Thu, 27 Aug 2015 01:25 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला हिसार
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स्पेशल बस चलाने की मांग को लेकर छोटी न्यौली के ग्रामीणों ने बुधवार को खूब हंगामा किया। आदमपुर से चलकर छोटी न्यौली के रास्ते हिसार आने वाली बस को सुबह आठ बजे ही ग्रामीणों ने बस अड्डे पर रोककर अपने कब्जे में ले लिया।
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ग्रामीणों ने कंडक्टर-ड्राइवर को भी नीचे उतारकर अपने पास बैठा लिया। ऐलान किया कि जब तक रोडवेज के जीएम या टीएम मौके पर आकर गांव के लिए स्पेशल बस चलाने का आश्वासन नहीं देंगे, तब तक बस नहीं छोड़ी जाएगी। सूचना मिलने पर ट्रैफिक मैनेजर जितेंद्र यादव ने सदर थाना में पुलिस को सूचित किया।

पुलिस ने सरपंच से बातचीत की। काफी देर बाद जदोजहद चलती रही। बाद में रोडवेज के चार सब इंस्पेक्टर धर्मपाल बिश्नोई, रणबीर बैनीवाल, रघुबीर जाखड़ व गोपीराम गांव पहुंचे। आखिरकार साढ़े आठ घंटे बाद शाम को ड्राइवर-कंडक्टर
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अनाउंसमेंट हुई, रोडवेज वाले आ गए, मंदिर में आ जाओ  
जैसे ही चारों सब इंस्पेक्टर गांव पहुंचे तो गांव के मंदिर के लाउडस्पीकर में अनाउंसमेंट कर दी गई कि रोडवेज वाले आ गए हैं, सभी मंदिर में आ जाओ।

देखते ही देखते करीब एक हजार ग्रामीण पुरुष व महिलाएं बस अड्डे के साथ लगते मंदिर में पहुंच गए। दो घंटे तक चारों सब इंस्पेक्टर के सामने ग्रामीणों ने जमकर विरोध जताया और गांव के लिए स्पेशल बस की मांग की। अधिकारियों ने ग्रामीणों को खूब समझाया। महिलाएं ने भी उग्र होते हुए चेतावनी दी कि अगर कल से बस नहीं चली तो मेन रोड जाम कर देंगे। आखिरकार करीब साढ़े चार बजे चारों सब इंस्पेक्टर ग्रामीणों को समझा-बुझाकर बस को छुड़वाकर हिसार डिपो लेकर आए।

एक-एक गांव को कैसे बस दें
गुस्साए ग्रामीणों ने जब कहा कि आदमपुर से चलकर गांव तक पहुंचते समय बस में भारी भीड़ हो जाती है। गांव के लोग बस में ढंग से चढ़ भी नहीं पाते हैं। इस पर चारों सब इंस्पेक्टरों ने ग्रामीणों को समझाया कि सुबह के समय प्रत्येक गांव के स्कूली विद्यार्थियों को एक बस की जरूरत है। मगर डिपो में बसों व स्टाफ की भारी कमी है। ऐसे में एक-एक गांव को कैसे बस दी जाए।


पहले इस रूट पर प्राइवेट बस चलती थी। अब नई पॉलिसी के तहत प्राइवेट बस संचालक द्वारा रूट बदलने के कारण यह समस्या आई है। फिर भी हमने रूट बढ़ाकर गांव में बस चलाई है। अब ग्रामीण स्पेशल बस की मांग कर रहे हैं, मगर स्टाफ व बसों की कमी के कारण एक-एक गांव को कैसे स्पेशल बस दें।
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जितेंद्र सिंह, ट्रैफिक मैनेजर, हिसार डिपो
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