अमर उजाला ब्यूरो
हांसी (हिसार)। हिसार का बहुचर्चित भाटला सामाजिक बहिष्कार प्रकरण एक बार फिर चर्चा में है। अनुसूचित जाति व जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत हिसार में स्थापित विशेष अदालत ने 22 अक्तूबर को भाटला के एक पीड़ित अनुसूचित जाति के व्यक्ति की शिकायत पर थाना सदर हांसी के प्रभारी को गांव भाटला के ही गैर अनुसूचित जाति से संबंधित दो दुकानदारों सहित पांच अन्य के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट व आईपीसी की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं। इसके बाद अब सात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। इनमें जगदीप, नरेश, बिजेंद्र, हवा सिंह, सतबीर, सुभाष व रामनिवास शामिल हैं।
अदालत को दी शिकायत में भाटला के पीड़ित ने बताया कि उनके गांव में पिछले साल दो जुलाई से ही विशेष समुदाय का सामाजिक बहिष्कार गांव के तथाकथित सवर्ण जाति के लोगों द्वारा किया जा रहा है। इसके चलते पिछले साल 14 अगस्त को शिकायतकर्ता ने गांव के ही नाई का काम करने वाले सुभाष से फोन पर अपने बच्चों के बाल काटने के बारे में बात की तो सुभाष ने सामाजिक बहिष्कार का हवाला देते हुए बाल काटने से मना कर दिया और कहा कि अगर उसने बाल काटे तो उसके ऊपर 1100 रुपये जुर्माना लग जाएगा और उसका हुक्कापानी भी बंद हो जाएगा।
इसी तरह 14 अगस्त को ही शिकायतकर्ता ने गांव के ही रामनिवास, जो भाटला में किराने की दुकान चलाता है, को फोन करके सामान देने की बात कही तो उसने भी सामान देने में असमर्थता जाहिर करते हुए कहा कि मैं पहले तुमको सामान देता था, अब तो करड़ा काम हो रैया सै...। फोटो उतारने वाले दुकान के बाहर बैठे हैं, अगर कोई आया तो फोटो खींच लेंगे और जुर्माना लगा देंगे। दोनों मामलों की बातचीत शिकायतकर्ता के फोन में रिकॉर्ड हो गई, जिसकी शिकायतकर्ता ने सीडी बनाकर एक शिकायत के साथ एसएसपी हांसी व हिसार के सत्र न्यायाधीश को शिकायत भेज दी। इस पर पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की, लेकिन हिसार के जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने पत्र लिखकर हांसी की तत्कालीन एसपी प्रतीक्षा गोदारा को जरूरी कार्रवाई करने को कहा। अब दोबारा कोर्ट द्वारा आदेश जारी किए जाने के बाद सदर थाने में सात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
हैंडपंप पर पानी भरने को लेकर हुआ था विवाद
भाटला गांव में 15 जून 2017 में हैंडपंप पर पानी भरने को लेकर विवाद हुआ था। उस केस में पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई थी। इसके विरोध में समुदाय विशेष ने आरोप लगाया कि गांव के चौकीदार द्वारा मुनादी करवाकर बहिष्कार कराया गया। इसके बाद मामला तूल पकड़ गया और समुदाय विशेष ने कोर्ट में याचिका लगा दी। इसके बाद गांव में अधिकारियों द्वारा कई बार दौरा किया। इस बीच पीड़ितों ने हिसार सेशन कोर्ट में भी याचिका दायर कर दी। पीड़ितों के वकील रजत कल्सन ने बताया कि पुलिस के पास आरटीआई लगाई तो जवाब मिला कि हमें कोर्ट की ओर से कार्रवाई न करने के आदेश मिले हैं। इस पर कोर्ट में आरटीआई लगाई तो बताया कि सदर थाना हांसी के एसएचओ उमेश सिंह को कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं। सामाजिक बहिष्कार के चलते भाटला के समुदाय विशेष के लोग धर्म परिवर्तन भी कर चुके हैं। उनका आरोप है कि पुलिस प्रशासन का रवैया उनके प्रति सही नहीं है।
आईपीसी की इन धाराओं के तहत हुआ मामला दर्ज
पुलिस ने आरोपी बिजेंद्र, सतबीर, नरेश, जगदीप, हवासिंह, सुभाष और रामनिवास के खिलाफ आईपीसी की धारा 120बी, 153ए, 504, 505, 506 और एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है।