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दुष्कर्म पीड़ित मासूम हिसार रेफर, चेहरे पर खौफनाक शिकन, 36 घंटे बाद लिए चाय और ब्रेड

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अमर उजाला ब्यूरो
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हिसार।
नारनौंद क्षेत्र के एक गांव की दुष्कर्म पीड़िता आठ साल की मासूम बच्ची को उपचार के लिए नारनौंद सीएचसी से हिसार के नागरिक अस्पताल में भेज दिया गया है। महिला चिकित्सक और मनोवैज्ञानिक की देखरेख में शुक्रवार को उसका उपचार किया गया। बच्ची की हालत स्थिर बताई गई है। बच्ची ने घटना के 36 घंटे बाद एक चाय पी और एक ब्रेड खाया। उसके चेहरे पर खौफनाक शिकन है। मामले की गंभीरता को देखते हुए बाल अधिकार संरक्षण आयोग की चेयरपर्सन ज्योति बैंदा ने अस्पताल पहुंचकर परिजनों से बातचीत कर बच्ची का हाल-चाल जाना। इसके अलावा कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर ने भी नागरिक अस्पताल पहुंचकर दुष्कर्म पीड़िता का हालचाल जाना। वहीं कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर ने भी बच्ची का हाल-चाल जाना।
पीड़िता के पिता ने बताया कि बच्ची ने 36 घंटे बाद शुक्रवार को एक चाय के साथ कुछ ब्रेड खाया। उसके बाद हमें थोड़ी सी राहत मिली। उन्होंने कहा कि वह बच्ची को देखते हैं तो उनका कुछ खाने का मन नहीं करता। वे इस गांव में 20 साल से रह रहे हैं। आज तक ऐसी घिनौनी हरकत किसी के साथ नहीं हुई। उन्होंने बताया कि बच्ची के साथ हैवानियत करने वाले को हमने ढूंढने की कोशिश की थी। बेेशक मजदूरी कर गुजारा करते हैं, इज्जत के लिए जान तक कुर्बान कर सकते हैं।
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महिला पुलिस अधिकारी और बच्ची के परिजनों की देखरेख में बच्ची का अल्ट्रासाउंड कराया गया। परिजनों ने बताया कि अस्पताल के कर्मचारियों ने बच्ची का अल्ट्रासाउंड करने से इनकार किया था। वे बोले-आपको अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में अल्ट्रासाउंड कराना पड़ेगा। इस पर पिता ने कहा कि बच्ची कहीं नहीं जाएगी, आपको यहीं अल्ट्रासाउंड करना पड़ेगा। अपने अधिकारियों से बात करो। इस दौरान महिला पुलिस अधिकारी ने अस्पताल के प्रशासनिक अधिकारियों से बातचीत की, जिसके बाद बच्ची का अल्ट्रासाउंड वहीं पर हुआ।
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हर रोज मुझे भेजी जाए बच्ची की काउंसिलिंग की रिपोर्ट : बैंदा
बाल अधिकार संरक्षण आयोग की चेयरपर्सन ज्योति बैंदा ने डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधन से भी बात की। उन्होंने बताया कि बच्ची के परिजनों से उपचार में लापरवाही बरतने वाले चिकित्सक के संबंध में बातचीत की थी। वे उस संबंध में सही तरह से कुछ बता नहीं पाए। उपचार में लापरवाही बरतने वाला पुरुष चिकित्सक था या महिला चिकित्सक या कोई नर्स थी। इस संबंध में शिकायत नहीं मिली है। काउंसिलिंग के बाद परिजन जैसे बयान देंगे, उसी आधार पर चिकित्सक के खिलाफ एक्शन लिया जाएगा। इसको लेकर आदेश जारी कर दिए हैं। चेयरपर्सन ने सीएमओ डॉ. जितेंद्र कादियान को आदेश दिए कि दो महिला अटेंडेंट हर समय बच्ची के पास रहेंगी और एक महिला चिकित्सक की निगरानी में इलाज किया जाएगा। बच्ची और परिजनों की रोज एक या दो बार काउंसिलिंग की जाएगी, ताकि वे सदमे से बाहर आ सकें और घटना संबंध में सही तरह से जानकारी दे सकें। रोज होने वाली काउंसिलिंग की रिपोर्ट मुझे भेजी जाए। जिसके आधार पर कमीशन को रिपोर्ट सौंपी जा सके।
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