अमर उजाला ब्यूरो
हिसार। बजाज फाइनेंस कंपनी में लोन लेने के चलते सोमवार को विवाद हो गया। सूत्रों के अनुसार यह मामला थाने भी पहुंचा, लेकिन आपसी सहमति के बाद विवाद को सुलझा लिया गया। उधर, कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में एग्जीक्यूटिव की गलती पाई गई है, जिसके खिलाफ कार्रवाई की गई है।
जानकारी के अनुसार बजाज फाइनेंस कंपनी में कस्टमर का डिजिटल कार्ड बनाया जाता है। यही मोबाइल कार्ड होता है और इसकी उपभोक्ता की लिमिट तय की जाती है, जो समय-समय पर बढ़ती रहती है। कार्ड से उपभोक्ता की लिमिट का पता चलता है। कंपनी का जो एग्जीक्यूटिव होता है, जिसको उपभोक्ता द्वारा लोन लेने के समय वेरिफिकेशन करना होता है, उसे उपभोक्ता के कार्ड का पासवर्ड पता होता है। सूत्रों के अनुसार मामले का खुलासा उस समय हुआ, जब एक कस्टमर को उसके कार्ड की डिटेल मिली, जिसमें दो लोन का खुलासा हुआ, जबकि उसने लैपटॉप पर एक ही लोन लिया हुआ था। उसने जब इस बारे में कंपनी अधिकारियों से बात की तो मामले का खुलासा हुआ। बताया जा रहा है कि इस मामले को लेकर उपभोक्ता पुलिस के पास भी गया, लेकिन कंपनी अधिकारियों और उपभोक्ता के बीच समझौता होने के बाद इसकी कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है।
कंपनी द्वारा प्रोडक्ट फाइनेंस किया जाता है, कैश नहीं। इस केस में फाइनेंस कराने के बाद कैश लिया गया था, जो नियमानुसार गलत है। इसमें एग्जीक्यूटिव की गलती पाई गई है, जिससे हमने चेक ले लिया है और उसके खिलाफ कार्रवाई भी की गई है।
- चंद्रशेखर, सेल्स मैनेजर, बजाज फाइनेंस, हिसार।
कस्टमर लैपटॉप लेकर गया था। दूसरा लोन मेरे यहां से नहीं हुआ है। ऐसा आप कस्टमर से कन्फर्म कर सकते हैं।
-मोहित, मालिक, द लैपटॉप्स, रेडक्रॉस मार्केट, हिसार।